ललितपुर। लोकसभा चुनाव के महासंग्राम में विभिन्न दलों के अधिकृत उम्मीदवारों ने नामांकन के दौरान ताकत का प्रदर्शन किया। वहीं, बुजुर्ग व्यक्ति दुकानों पर चाय की चुस्की के साथ सियासी चर्चा कर रहे हैं। ऐसा ही नजारा ललित टॉकीज के पास चाय की दुकान का रहा।
ग्राम खड़ेरा निवासी भगवत कहते हैं कि जैसई चुनाव आऊन लगत, सो वैसई नेतन को रंग बदलवो शुरू हो जात। मूंछन पै ताव दैवे वाले नेतन की चाल-ढाल बदल जात। हाथ जोरकैं गांव से निकरन लगत। कछु छुटभैया नेता तो भुंसारो होतइ आंखें मीड़त घर से निकर आऊत और वे द्वारे-द्वारे वोटन के लानें कांव-कांव करन लगत। मोहल्ला चिरौलपुरा निवासी जलील शामा कहते हैं कि जैसई चुनाव की डुगडुगी बजत है, वैसई अधिकारियन खों मतदान बढ़वावे को जिम्मा मिल जात और वे जनता के बीच दिखान लगत। ऐसे खुद खों दिखात, जैसे वेइ सबसे बड़े शुभचिंतक हों। ऐसई हाल समाज के मुखिया, माते व समाज के ठेकेदारन को हो जात। वे जानत हैं कि नेतन के सामने भीड़ दिखाए बगैर कौनऊ काम नई हुइये। ऐइसें वे समाज के चुनाव करावे में जुट जात तो कौनऊ समाज के पदाधिकारियों के संगें घूमन लगत। पार्टियन के नेतन से भी उनकी चिनारी करान लगत। समाज के पदाधिकारियों खों लगत है कि वे हमाइ पैचान बढ़ा रहे, जबकि उनै का मालूम कि उनको मौं दिखाकें वोटन को सौदा हो रओ। वोटन के लाजें नेता लंबौ कुरता पैर कें घूमन लगत।
गल्ला मंडी निवासी वीरेंद्र कुमार कहते हैं कि पैले के चुनाव में लोगन को इमान-धर्म होत तो। भुंसारे से लोग घर सें कलेऊ बांध कें प्रचार के लाजें निकरतते। अब तो घर सें भूखे पेट निकरत और बियारी करकें घरै लौटत। सब कछु को इंतजाम पार्टियन के नेता करत। मोहल्ला रावरपुरा निवासी अरुण चौरसिया कहते हैं कि चुनाव आयोग ने काले धन खों चुनाव में लगावे से रोकवे के लाजें कानून बनाए हैं, लेकिन नेता हैं कि वे अपनी फितरत से बाज नहीं आऊत। दुका - छिपाकें वोट खरीद लेत। कोनऊ वोटरन कों दारू, मुर्गा की पार्टी देत तो कोनऊ मुखिया, माते व ठेकेदारन कों पैसा देकें वोट की गांरटी लेत हैं। मुहल्ला रावरपुरा निवासी पदमचंद कहते हैं कि जब तक वोटन की खरीद- फरोख्त बंद नहीं होत, तब तक जनता के दुख दर्द समझवे वाले नेता मिलवो मुश्किल है। जब चुनाव में करोड़न रुपया खर्चा हुइये तो उनसे समाजसेवा की उम्मीद पालवो खुद को धोखा देवो जैसो है। इसी दौरान कई और लोग चाय पीने के लिए आ जाते हैं। इस कारण चर्चा का क्रम टूट जाता है।