ललितपुर। बेसिक शिक्षा कार्यालय की लचर कार्यप्रणाली का खामियाजा वहां कार्यरत कर्मियों को भुगतना पड़ रहा है। तमाम कर्मियों को महीनों से मानदेय नहीं मिल पाया है, जिससे उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यदि उन्हें जल्द ही मानदेय नहीं मिला तो उनकी दीवाली फीकी रह जाएगी।
जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में डेढ़ हजार से ज्यादा शिक्षामित्र हैं, इनमें से करीब 1200 शिक्षा मित्रों का समायोजन सहायक अध्यापक पद पर किया जा चुका है। वर्तमान में करीब तीन सैकड़ा शिक्षामित्र या तो प्रशिक्षण ले चुके हैं या फिर दूरस्थ शिक्षा के जरिए प्रशिक्षण पा रहे हैं। इन कर्मियों के सामने अजीबोगरीब हालत बन गए हैं।
उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा समायोजन रद किए जाने से समायोजित शिक्षामित्रों का वेतन अटककर रह गया है और तीन सैकड़ा शिक्षामित्रों को महीनों से मानदेय नहीं मिल पा रहा है। जिन शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन नहीं हो सका है, उन्हें माह मार्च से मानदेय नहीं मिला है जबकि समायोजित शिक्षकों को माह मई से वेतन की दरकार है। वहीं, 571 अनुदेशकों को सितंबर माह तक का ही मानदेय दिया गया है,
अभी उन्हें अक्तूबर माह का मानदेय मिलना शेष है। इसी प्रकार कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों के शिक्षक कर्मियों को जुलाई माह से वेतन नहीं मिल पाया है। आउट सोर्सिंग के तहत रखे गए कंप्यूटर आपरेटर व अकाउंटेंट को भी जुलाई माह से मानदेय नहीं मिल सका है।
साक्षर भारत मिशन के प्रेरकों का तो और भी बुरा हाल है। प्रेरकों को वर्ष 2013 तक का ही मानदेय हासिल हो पाया है। इतना ही नहीं, ब्लाक कोआर्डिनेटरों को भी जुलाई माह से मानदेय नहीं मिला है। इसके पीछे खंड शिक्षा अधिकारियों का स्थानांतरण एक वजह माना जा रहा है। मिड-डे मील योजना में लगे रसोइयों को भी जुलाई माह से मानदेय नहीं मिला है।
इन हालात में शिक्षाकर्मियों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इससे उनमें विभाग के प्रति असंतोष पनप रहा है। शिक्षा कर्मियों का कहना है कि यदि दीवाली के पहले मानदेय नहीं मिला तो उनके सामने त्योहार मनाने की समस्या खड़ी हो जाएगी। विभागीय अफसर इस मामले में मौन बने हुए हैं।