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ई एजूकेशन सबसे सस्ता एवं सुलभ सीखने का माध्यम है

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ललितपुर। कोविड-19 महामारी के चलते शिक्षा क्षेत्र में दृष्टव्य शिथिलता को लेकर शिक्षा तकनीकी संसाधनों के उपयोग के माध्यम से दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी सेमीनार/वेबीनार का आयोजन भगवान आदिनाथ कॉलेज ऑफ एजुकेशन में किया गया। इसमें 15 राज्यों के 328 विश्वविद्यालय के प्रवक्ता, शिक्षक और शिक्षाविदों ने ऑनलाइन प्रतिभाग किया। वक्ताओं ने कहा कि ई-एजूकेशन सीखने का सबसे सस्ता और सुलभ माध्यम है।
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डॉ. यशोधरा शर्मा ने कहा के ई-एजूकेशन सबसे सस्ता और सबसे सुलभ सीखने का माध्यम है, जो न केवल छात्रों अपितु शिक्षकों व अभिभावकों को निरंतर सीखने के लिये प्रेरित करता है। डॉ. अनिल सूर्यवंशी एसोसिएट प्रोफेसर नेहरू महाविद्यालय ने ऑनलाइन हेल्थ अवेयरनेस पर चर्चा करते हुए कहा कि ऑनलाइन एजूकेशन द्वारा शारीरिक रोगो के निदान संबंधी बातों को हम प्रथम चरण में ही जान सकते हैं।
डॉ. रोहित कुमार ने कहा कि यह संस्था का प्रथम प्रयास है, जिसके द्वारा राष्ट्रीय स्तर का सेमिनार आयोजन किया जा रहा है। प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार जैन ने कहा कि ऑनलाइन तकनीकि शिक्षा आज के समय की आवश्यकता हो गई है, जिस विषय पर हम सभी को विकसित एवं समृद्ध करने की आवश्यकता है। भगवान आदिनाथ कॉलेज ऑफ एजूकेशन के अध्यक्ष प्रदीप कुमार ने कहा कि इस महामारी काल में ऑनलाइन एजूकेशन शिक्षा पाने का ऐसा उपक्रम है, जिसके माध्यम से हम आसानी से सभी प्रकार के कोर्सो एवं विभन्न पदो पर नियोजन हेतु आवश्यक तैयारी घर बैठे कर सकते हैं। डॉ. विजय कुमार ने अपने शोघ पत्र से बताया कि ऑनलाइन शिक्षा बहुभाषीय, बहुसांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक, जाति धर्म और रंग के बीच समान सुगमता से शिक्षा पहुंचाने का माध्यम है। एसवी विश्वविद्यालय गजरौला के कुलपति बिग्रेडियर डॉ. वीडी अब्रॉहम ने कहा कि ज्ञान किसी उम्र या किसी व्यक्ति का मोहताज नहीं होता। व्यक्ति अपने पुरुषार्थ से अपने प्रयासों से उसको कहीं भी कभी भी हासिल कर सकता है। डॉ. अमरजीत सिंह परिहार ने अपने शोध पत्र में रेगुलूशन ऑफ डिजीटल लर्निंग डयू टू पैंडमिक लॉकडाउन कोविड -19 पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जिस प्रकार 1857 की क्रांति ने देश में स्वतंन्त्रता की नई लहर फूकीं, उसी प्रकार ऑनलाइन एजूकेशन ने शिक्षा के क्षेत्र में डिजीटल क्रांति को जन्म दिया है। डॉ. अरुणा सिंघल ने कहा कि 1960 में सबसे पहले सेमिनार की परिकल्पना अमेरिका में हुई, जो आज 60 वर्षो में एक क्रांति के रूप में हमें दिखती है।
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डॉ नीलू समीर, डॉ. रोहित कुमार जैन, प्रो. विनोद कुमार बौद्व, प्रो. अश्विनी जैन ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये। इस दौरान डॉ. नरेेंद्र कुमार शर्मा, डॉ. सुनील कुमार जैन, प्रदीप कुमार जैन, डॉ. नरेद्र कुमार शर्मा, प्रो अश्विनी कुमार जैन, प्रो. विनोद कुमार आदि मौजूद रहे।
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