रक्षाबंधन को लेकर बाजार में सजी राखी की दुकानें
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। श्रावण के अंतिम सोमवार श्रावण पूर्णिमा पर तीन अगस्त को श्रावण नक्षत्र और आयुष्मान योग में रक्षाबंधन का अद्भुत संयोग बन रहा है। इस दिन न तो किसी ग्रहण की छाया होगी और न भद्रा नक्षत्र का दीर्घकालिक झंझट रहेगा। आयुष्मान योग में बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी। उधर, शनिवार और रविवार को बाजार बंद रहने के कारण शुक्रवार को बहनों ने अपने भाइयों के लिए राखी की खरीदारी की। इस दौरान मिठाइयां भी खूब बिकीं। बाजार में राखियां खरीदने के लिए दुकानों पर बहनों की भीड़ लगी रही।
नेहरू महाविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष एवं ज्योतिषाचार्य डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री ने बताया कि राखी बांधने के लिए पूर्णिमा सोमवार तीन अगस्त को सुबह साढ़े आठ बजे के बाद से दिनभर शुभ मुहूर्त है। भद्रा नक्षत्र दो अगस्त के दिन रविवार को रात 8:36 बजे से शुरू होकर तीन अगस्त को सुबह 8:30 बजे तक रहेगा। इसलिए सोमवार को सुबह 8:30 बजे के बाद से दिन भर रक्षाबंधन मनाया जाएगा। तीन अगस्त को दिन में सुबह 7:49 से दीर्घायु करने वाला आयुष्मान योग लग रहा है, जो इस साल रक्षाबंधन में विशेष संयोग बना रहा है।
भाई के दाहिने हाथ की कलाई पर राखी बांधना चाहिए
उन्होंने कहा कि इसी दिन श्रावण के महीने का अंतिम सोमवार भी है। इस बार श्रावण के महीने में पांच सोमवार का योग पड़ा है। इसलिए रक्षाबंधन का व्रत करने वाले और सोमवार का व्रत करने वाले सभी लोग प्रात: स्नानादि करके ऋषियों का पूजन करें। उसके पश्चात श्रावणी पर्व, जो खासकर वैदिक विद्वानों को आयोजित करना चाहिए, उनको सुबह आठ बजे स्नान, पंचगव्य आदि से राष्ट्र के कल्याण के लिए अग्नि प्रज्जवलित करके वेद के राष्ट्रसूक्त से हवन करना चाहिए। बहनों को सरसों, केसर, चंदन, अक्षत, दूर्बा और पवित्र रक्षाबंधन का धागा रखकर उसका पूजन विधि पूर्वक करना चाहिए। इसके बाद बहनों को अपने भाई के दाहिने हाथ की कलाई पर राखी बांधना चाहिए। रक्षाबंधन पर्व पर बहनें अपने भाई की दीर्घायु की कामना करती हैं। श्रावणी पर्व मनाने वाले वैदिक विद्वान राष्ट्र में धर्म की स्थापना और जन कल्याण के लिए श्रावणी पर्व मनाते हैं।
बाजार में राखी के त्योहार पर राखी की खरीदारी करती युवती व महिलाएं- फोटो : LALITPUR