ललितपुर। परिषदीय स्कूलों में अतिरिक्त कक्षों की आवश्यकता दर्शाकर शासन द्वारा जारी एसएसए की धनराशि ठिकाने लगाई जा रही है। घोर लापरवाही करते हुए अधिकारियों ने इस राशि से बनने वाले भवनों को सुनसान इलाकों व कचरे के ढेरों पर बनवा दिया। इन भवनों में जब कक्षाएं चलाने की बारी आई तो अधिकारियों ने रुचि नहीं ली। ऐसे में अभिभावकों ने भी अपने बच्चों को सुनसान व कचरे के आसपास बने भवन में पढ़ाने से इनकार कर दिया है।
इस स्थिति में शासन द्वारा जारी की गई राशि का दुरुपयोग तो हुआ ही सरकार की मंशा पर भी पानी फेर दिया गया है। इसका गवाह शताब्दी रामनगर स्कूल का भवन है। निर्माण के चार साल बाद से उसमें आज तक कक्षाएं नहीं लगाई जा सकी हैं। नतीजतन भवन दुर्दशाग्रस्त हो चुका है। उसमें कुत्ते, सुअरों का जमावड़ा रहता है।
शासन की ओर से छह से चौदह वर्ष की आयु वर्ग के सभी बच्चों को जूनियर स्तर की शिक्षा मुुहैया कराने के मकसद से सर्व शिक्षा अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत स्कूल भवन, चारदीवारी, शौचालय, अतिरिक्त कक्ष निर्माण के लिए विभाग को धनराशि प्रदान की जाती है। बीते वर्षों में ललितपुर जिले को बड़ी संख्या में अतिरिक्त क्लास लगाने के उद्देश्य से कक्ष निर्माण के लिए राशि जारी की गई।
इसके मद्देनजर चार साल पूर्व तत्कालीन बीएसए ने किराए के भवन में संचालित प्राथमिक शताब्दी रामनगर स्कूल को तीन अतिरिक्त कक्षों व दालान निर्माण के लिए छह लाख तीस हजार रुपये जारी कर दिए। खंड शिक्षा अधिकारी नगर आभा अग्रवाल ने इसकी कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए मुहल्ला रामनगर में भवन निर्माण करा दिया। लेकिन, इसमें घोर लापरवाही की गई। भवन को सुनसान इलाके में कूड़े के ढेर को हटाकर बना दिया गया।
लेकिन, जब कक्षाएं लगाने की बारी आई तो विभागीय अफसर इधर, उधर हो लिए। अभिभावकों ने भी भवन के आसपास कचरा व सुनसान इलाका देख बच्चों को भेजने से इनकार कर दिया। हद तो ये है कि लाखों रुपये खर्च कर बने भवन की ओर विभागीय अफसरों ने पलटकर भी नहीं देखा। वर्तमान में भवन जीर्णशीर्ण अवस्था में है। न केवल भवन की छत टपक रही है बल्कि दीवारों में दरारें व दालान के फर्श पर खरपतवार उग आई है। दूर-दूर तक कोई नजर नहीं आता है। कूड़े के डंप पर सुअर व कुत्ते ही विचरण करते दिखते हैं और भवन उनका आरामगाह बना हुआ है।
यहां लगती कक्षाएं
प्राथमिक विद्यालय शताब्दी रामनगर आज भी स्थाई भवन के लिए तरस रहा है। इसकी कक्षाएं प्राथमिक विद्यालय बड़ापुरा में संचालित हो रही हैं। इस तरह एक भवन में दो स्कूल की कक्षाएं लग रही हैं।
कूड़े की वजह से कक्षाएं नहीं लगाई गई हैं। तत्कालीन बीएसए विनोद मिश्रा ने नगर पालिका परिषद अध्यक्ष सुभाष जायसवाल से वार्ता की थी। जिस पर उन्होंने इस भवन के बदले में अन्य जगह दूसरा भवन बनवाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद से नए भवन के मिलने का इंतजार किया जा रहा है।
- आभा अग्रवाल, खंड शिक्षा अधिकारी नगर