ललितपुर। सूखा की विभीषका से जूझ रहे जिले में मूक पशुओं के लिए तालाब भरने की योजना कारगर साबित नहीं हो पाई है। स्थिति यह है कि सिर्फ 28 तालाबों में ही पानी भर सका है, वह भी पशुओं के लिए काम चलाऊ स्थिति में। ऐसे में आने वाला समय जानवरों के लिए काफी कठिनाई वाला साबित होगा।
सूखा के कारण इंसान ही नहीं पशु भी बेहाल हैं। बुंदेलखंड में अन्ना प्रथा के कारण गर्मी के सीजन में पशुओं की तादाद काफी बढ़ जाती है। ज्यादातर किसान जानवरों को छुट्टा छोड़ देते हैं। लगातार दो साल से स्वयं के खाने का इंतजाम नहीं होने के कारण किसान परेशान है।
ऐसे में किसान के पास अब सिर्फ वही पशु रह गए हैं, जो दूध दे रहे हैं। बाकी छुट्टा घूम रहे हैं। इस कारण यह इधर से उधर घूमते रहते हैं। पशुओं को पानी का इंतजाम हो, इसके लिए जिला प्रशासन ने तालाबों में पानी भरवाने के निर्देश दिए थे।
इस दौरान तालाबों के आसपास ट्यूबवेल से तालाबों में पानी डाला गया। हालांकि, तालाब भरने की बात कही जा रही है, लेकिन तालाबों में इतना पानी पहुंच गया है कि जानवरों को पानी की कोई परेशानी नहीं हो रही है। साथ ही चारा बैंक के माध्यम से पशुओं को चारा उपलब्ध कराया जाने लगा है।
जिला पंचायत राज विभाग को तालाबों में पानी भरवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसमें से 28 तालाबों में पानी भर गया है। अपर जिलाधिकारी एमके त्रिवेदी ने बताया कि जिले में 136 में से कुल 28 तालाबों में पानी भरवा दिया गया है। 98 तालाब सूखे पड़े हैं।
उन्होंने बताया कि इन तालाबों को भरवाने के लिए आसपास कोई ट्यूबवेल का साधन नहीं था, जिस कारण यह तालाब नहीं भरवाए जा सके हैं। उन्होंने बताया कि जिले की 280 ग्राम सभाओं में कोई तालाब नहीं है। जिले मे कुल 416 ग्राम पंचायतें है, जिसमें से कुल 28 ग्राम पंचायतों में पानी भरवाया जा सका है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि सूखा की त्रासदी का कितना व्यापक असर है।
फसल बीमा के बंट गए 79 करोड़
जिले में किसान फसल बीमा को लेकर आए दिन कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर रहे हैं और बीमा का पैसा देने की मांग कर रहे हैं। लेकिन, किसानों को शायद पता नहीं होगा कि जिले में 79 करोड़ रुपये बांट दिए गए हैं। किसानों का फसल बीमा का प्रीमियम अस्सी करोड़ रुपये बना था। इसमें से अब तक 79 करोड़ किसानों को वितरित कर दिया गया है। अब शेष एक करोड़ रुपया जल्द वितरित कर दिया जाएगा।