ललितपुर। सूखे में कृषि आधारित रोजगार छिन जाने से गरीब ग्रामीणों के समक्ष रोजगार का संकट उत्पन्न हो गया है। मनरेगा सरीखी योजनाएं हालातों से निपटने में नाकाम साबित हो रही हैं। ऐसे में ग्रामीणों ने तो काम के अभाव में महानगरों की ओर पलायन शुरू कर दिया है।
मानसून सीजन में औसत से काफी कम बारिश हुई थी, जिससे खेतों में नमी न के बराबर रह गई है। कृषक यदि थोड़ी सी नमी में बुवाई कर लेते हैं तो उनके सामने पलेवा का संकट है। इन हालातों का भांप कर किसान खाली खेत छोड़ने को विवश हो रहे हैं और जिन किसानों के पास सिंचाई के संसाधन हैं,
सिर्फ वह ही रबी फसल की बुवाई कर पा रहे हैं। ऐसी स्थिति में बहुत से गांवों में सैकड़ों एकड़ भूमि खाली पड़ी है, जिसका असर रोजगार पर पड़ा है। विशेषकर कृषि आधारित रोजगार लगभग समाप्त हो गया है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में तमाम कामगार काम मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन उनकी आस पूरी नहीं हो रह है। ऐसे में उन्होंने काम के अभाव में महानगरों की ओर पलायन आरंभ कर दिया है।
बृहस्पतिवार को विकासखंड तालबेहट के अंतर्गत ग्राम पूराकलां से एक दर्जन से ज्यादा सहरिया परिवार मध्यप्रदेश के इंदौर चले गए। ग्राम पूराकलां के मजरा पूरा पठारी निवासी मकुंदी का कहना है कि गांव में उनके जॉब कार्ड बने हैं, लेकिन, उन्हें काम नहीं मिलता है। किशोरी पुत्र खुमान सहरिया का कहना है कि गांव के जनप्रतिनिधि उन्हें काम नहीं देते हैं, जिस कारण ईंट बनाने के लिए इंदौर जा रहे हैं। राकेश पुत्र श्यामलाल और बबलू पुत्र जसरथ ने भी गांव में काम नहीं मिलने की समस्या बताई।
घरों में लटकने लगे ताले
जिले का अकेला तालबेहट ब्लाक ही नहीं है, बल्कि अन्य ब्लाकों से भी सहरिया और अन्य ग्रामीण मजदूर परिवार रोजगार की तलाश में पलायन कर रहे हैं। कई परिवार तो बच्चों सहित मध्य प्रदेश के जिले इंदौर, भोपाल व ग्वालियर जा रहे हैं। यही वजह है कि सहरिया परिवारों के घरों में ताले जड़े दिखाई देने लगे हैं।
एक दर्जन से अधिक किसानों की हो चुकी मौत
जिले में एक दर्जन से ज्यादा किसानों की मौत से पता चलता है कि सूखे की विभीषिका को किसान बर्दाश्त नहीं कर पाए हैं। इसमें से ज्यादातर किसानों की मौत बरबाद फसल को देखकर सदमे के कारण हुई है। लेकिन, विडंबना यह है कि शासन और प्रशासन अभी तक इन किसानों को राहत नहीं पहुंचा पाया है और न ही रोजगार की व्यवस्था कर सका है। ऐसे में दिनों- दिन हालात विकट होते जा रहे हैं।
नगरवासियों ने समझाया, पर नहीं माने
ग्राम पूरा पठारी के मजदूरों ने परिवार सहित सुबह ही घर छोड़ दिया था। चूंकि, शाम सात बजे इंदौर के लिए बस थी, इसलिए उन्होंने नगर संसाधन केंद्र के सामने खाली पड़े प्लाट में डेरा डाल दिया। यहीं पर महिलाओं ने ईंट का चूल्हा व झांकड़ जुटाकर भोजन पकाया और शाम होने तक इंतजार किया।
महत्वपूर्ण बात यह है कि परिवार के साथ इंदौर जा रहे नन्हें-मुन्नों के बदन पर गर्म कपड़े नहीं थे। नगर के लोगों ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माने।
सरकार से उम्मीद
सूखे के हालातों का जायजा लेने गत दिवस जिले के दौरे पर आए केंद्रीय कृषि और कल्याण मंत्रालय के निदेशक डा. एमसी दिवाकर के आने से सूखा पीड़ित किसानों को राहत राशि मिलने की उम्मीद बंधी है, लेकिन रबी फसल में हुई ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से बरबाद फसलों का अब तक मुआवजा नहीं मिल पाने से किसानों में रोष है।
उनका कहना है कि यदि विपत्ति के इस समय में उनको राहत राशि मिल जाती तो काफी सहूलियत हो जाती।