डोंगराखुर्द (ललितपुर)। नेशनल हाईवे के सामने नदी से दोपहिया वाहन चालक जान जोखिम में डालकर निकाल रहे हैं। बारिश में बांध के गेट खुलने से यहां बना रपटा बह गया है। इसके बाद वाहन चालक पत्थरों के ऊपर से निकलकर नदी पार कर रहे हैं।
यूं तो जामनी बांध के ऊपर पुल बना है, लेकिन सड़क संकरी होने और चार किमी लंबा मार्ग होने से वाहन चालक नदी के बीच से गुजरते हैं। गौना, नाराहट, सड़खरी, जमौरा, उमरिया, झरावटा, बगौनी, इमलिया, नयागांव, बछरई, मकरीपुर, ललितपुर, बनयाना, अर्जुन खिरिया, दौलतपुर, डोंगराखुर्द, दिगवार, बरेजा, पटना, पारौल, गुरयाना, चांदोरा, गुढ़ा खिरिया, सिंगरवारा, ककरूआ, गुढ़ा, पड़रिया, देवरी, मुड़िया, गदौरा, बहादुरपुर आदि गांवों के लोग जामनी बांध से निकली नदी पार करते हैं। बारिश के दिनों में बांध के गेट खुलने के बाद पानी के तेज बहाव में इन पत्थरों पर जमा मिट्टी बह गई है। अब पत्थरों पर फिसलन हो गई है। ऐसे में जान जोखिम में डालकर लोगों को नदी पार करना पड़ रहा है। क्षेत्र के लोगों ने पुल बनवाने की मांग शासन प्रशासन से कई बार की, लेकिन अनदेखी कर दी गई।
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पत्थरों से गुजरती हैं बसें
ग्रामीणों के मुताबिक सहालग के समय बांध के ऊपर से निकली सड़क पर जाम होने से बसें भी इन्हीं पत्थरों के ऊपर से किसी तरह निकाली जाती हैं। इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। बरसात के मौसम में यहां से निकलना मुश्किल भरा होता है।
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बांध की सुरक्षा से खिलवाड़
जामनी बांध सबसे पुराना है। वर्ष 1973 में यह परियोजना पूर्ण हुई थी। इस लिहाज से यह बांध अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। बांध के ऊपर बनी सड़क से भारी वाहनों का गुजरना बांध की सुरक्षा से खिलवाड़ है।