जनपद में दर्जनों ग्रामीण क्षेत्रों में नलकूप संयोजनों पर शत-प्रतिशत बकाएदारी चल रही है। फसलों की सिंचाई ओटीएस योजना से भी बिजली विभाग किसानों से बिलों का भुगतान अदा नहीं करवा सका है। इससे नलकूप कनेक्शनों को बिजली विभाग पर करोड़ों रुपया बकाया हो गया है। ऐसे हर गांव में 40 हजार से ढाई लाख रुपये तक के बकाएदारों द्वारा बकाया जमा नहीं किया गया है।।
जनपद में विद्युत विभाग द्वारा उपभोक्ताओं को खेतों की सिंचाई के लिए करीब पांच हजार से अधिक नलकूप विद्युत कनेक्शन जारी किए गए हैं। हर नलकूप कनेक्शन पर विभाग द्वारा फिक्स चार्ज के रुपये में करीब 1200 रुपये हर माह बिजली का बिल जारी होता है। ऐसे में एक वर्ष में एक उपभोक्ता पर करीब 15 हजार रुपये के बिल का भुगतान करना होता है। जनपद में अब तक 3540 नलकूप संयोजनधारी उपभोक्ताओं द्वारा विद्युत बिलों का भुगतान नहीं किया गया है। इसके चलते ऐसे सभी उपभोक्ताओं पर 25.78 करोड़ रुपये का बकाया हो गया है। दर्जनों गांव ऐसे हैं, जहां शत-प्रतिशत नलकूप संयोजनधारी उपभोक्ताओं द्वारा बिलों का भुगतान नहीं किया गया है और उन गांवों में लगभग सभी उपभोक्ताओं पर कम से कम 40 हजार रुपये और अधिकतम ढाई लाख रुपये तक बकाएदारी चल रही है। विद्युत उपखंड कार्यालय तृतीय महरौनी क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम सुनवाहा, पठा, बुदनी, गढ़ौली, मुढ़िया, लरगन, पचौड़ा, धवारी, पड़वा आदि समेत दर्जनों गांव शामिल हैं, जिनमें विभाग द्वारा किसी भी उपभोक्ता द्वारा बिलों का भुगतान नहीं किया गया है।
इन गांव में करीबन 70 से 80 उपभोक्ताओं द्वारा नलकूप विद्युत कनेक्शन लिए हैं। वहीं, उपखंड क्षेत्र के अंतर्गत मड़ावरा क्षेत्र में भी दर्जनों गांव ऐसे हैं, जहां शत-प्रतिशत उपभोक्ताओं पर बकाएदारी बताई जा रही है। उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन द्वारा ऐसे किसान उपभोक्ताओं से वसूली के लिए एक मुश्त समाधान योजना भी लागू की गई है। बिजली विभाग में ओटीएस योजना भी दो दिसंबर से लागू कर दी गई, लेकिन अभी तक आधा दर्जन किसान उपभोक्ताओं द्वारा ही ओटीएस योजना में पंजीकरण कराया जा सका है। जबकि अभी तक किसी भी ऐसे उपभोक्ताओं द्वारा बिलों का भुगतान नहीं किया गया है। हालांकि इसका कारण वर्तमान में किसानों के फसल की सिंचाई में व्यस्त होना है। विभागीय जानकारों के अनुसार ओटीएस का सही लाभ किसानों को मार्च के बाद ही मिलता है, जबकि विभाग को भी उसी समय अच्छा राजस्व प्राप्त होता है।