26 वार्ड वाले नगर की आबादी सवा दो लाख के करीब है। ग्रामीण क्षेत्र से लोगों के लगातार शहर की ओर आने के कारण मकानों की संख्या भी दिन प्रतिदिन बढ़ती चली जा रही है। मुहल्लों में खाली पड़े प्लाट अब भवनों में तब्दील हो गए हैं। नगरीय सीमा में भी वृद्धि हो रही है। रेलवे स्टेशन से लेकर करीब दो किलोमीटर तक सड़क किनारे कालोनियां बन चुकी हैं। हालांकि, नेहरूनगर के इलाके सहित अन्य क्षेत्र नगर पालिका सीमा से बाहर हैं। इसके बाद भी नपा को विकास करवाना पड़ता है तथा सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करना पड़ता है। बढ़ती नगरीय सीमा व भवनों के सापेक्ष नगर पालिका के पास साधनों का अभाव है। वर्तमान में कचरा उठान के लिए सात ट्रैक्टर, एक रिफ्यूज कंटेनर, एक नाला क्लीनर सहित अन्य वाहन हैं।
नगर के चौबयाना, मऊठाना, कटरा बाजार, रैदासपुरा, वंशीपुरा, सुभाषपुरा, पुरानी बजरिया, तालाबपुरा की अधिकांश गलियां इतनी संकरी हैं कि यहां से कचरा हाथ कूड़ा गाड़ी के माध्यम से निकाला जाता है। इसके बाद कच्चे या पक्के कूड़ाघर तक ले जाया जाता है। इसके बाद ट्रैक्टरों के माध्यम से निर्धारित स्थान रामनगर में पहुंचाया जाता है। लेकिन, इसके बाद भी बहुत सा कचरा छूट जाता है, जिससे नगर के कई इलाकों में गंदगी देखने को मिल रही है। जल निगम झांसी की कार्यदायी संस्था सीएनडीएस(कंस्ट्रक्टशन एंड डिजाइन सर्विसेज) व नगर पालिका ने मिलकर नगर को स्वच्छ बनाने के लिए प्राइवेट कंपनी को नगर का सर्वे करने की जिम्मेदारी दी है। दिल्ली की विजन ईआईएस कंसल्टेंसी कंपनी नगर से निकलने वाले कचरे का सर्वे कर रही है। यह कंपनी नगर में रखे कूड़ाघर, अस्थायी, स्थायी कचराघर सहित कचरे का बारीकी से सर्वे कर रही है। संकरी गलियों से किस प्रकार कचरा निकाला जाएगा, इस पर भी विचार किया जाएगा। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि कचरा के डोर-टू-डोर उठान के लिए घरों के बाहर दो कचरे के डिब्बे रखे जाएंगे, जिसमें सूखा और हरा कचरा डाला जाएगा।