ललितपुर। रक्त की कमी से किसी की जान न जाए, इसलिए जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में होने वाले स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर अमर उजाला ऐसे महादानियों को सलाम करता है। 14 जून को अमर उजाला फाउंडेशन के बैनर तले रक्तदान शिविर लगाया जाएगा।
कोरोना संकट में खून की कमी से जूझ रहे लोगों की जान बचाने के लिए महादानियों में खासा उत्साह है। 14 जून को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में सुबह नौ बजे से दो बजे तक रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। इसमें सहयोगी के तौर पर कई संस्थाओं ने मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया है। समाजसेवी संस्था जय अंबे रक्तदान समिति, ललितपुर सेवा ग्रुप, मुक्ति संस्था, कौमी एकता समिति, चित्रांश वेलफेयर सोसायटी, संत निरंकारी सेवा समिति और जिला खेलकूद एसोसिएशन ने आगे आकर रक्तदान करने का निर्णय लिया है।
भोजन करने के बाद एक से चार घंटे के बीच रक्तदान करना चाहिए। रक्तदाता का हीमोग्लोबिन 12.5 ग्राम होना चाहिए। एल्कोहल का प्रयोग न करें। रक्तदान से पूर्व दर्द की दवा एस्प्रिन अथवा डिस्प्रिन का प्रयोग न करें। रक्तदाता का वजन कम से कम पचास किलोग्राम होना चाहिए और रक्तदान से पूर्व की रात नींद भर सोना चाहिए। - प्रतिभा, काउंसलर, ब्लड बैंक, जिला अस्पताल
रक्तदान करने के अनेक फायदे हैं। इससे रक्त की बरबादी रुक जाती है। नया रक्त नियमित बनता रहता है। रक्तदान की एक यूनिट से चार से छह लोगों की जान बचाई जा सकती है। खून की छह प्रकार की जांचें हो जाती हैं। रक्तदान से पुराने गाढ़े रक्त से अनेक अनुपयोगी पदार्थ निकल जाते हैं। - डॉ. एस के वासवानी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
रक्तदान करने से कोई नुकसान नहीं होता, बल्कि इससे किसी की जान बचाई जा सकती है। सभी को रक्तदान करना चाहिए। - दीपक राठौर, जय अंबे रक्तदान समिति
जरूरतमंदों को खून की कमी न हो, इसलिए उनके लिए रक्तदान करते हैं। ताकि, उनका जीवन बचाया जा सके। - मोंटी शुक्ला, समाजसेवी
सभी को रक्तदान करने के लिए आगे आना चाहिए, जिससे किसी को खून की कमी न पड़े और मौके पर उसका इलाज हो जाए। - मो. नसीम, जिला खेलकूद एसोसिएशन
खून की कमी से किसी की जान न जाए, यही प्रयास रहता है। संकट में रक्तदाता ही मरीजों की लाइफ लाइन होते हैं। रक्तदान करने से किसी के जीवन को करीब से छूने का सुंदर अनुभव प्राप्त होता है। - डॉ. प्रबल सक्सेना, चित्रांश वेलफेयर सोसायटी