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डिप्टी सीएम के दौरे को लेकर अधूरे अमृत सरोवर पूर्ण कराने में जुटा जिला प्रशासन

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गौना का अमृत सरोवर -संवाद - फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के प्रस्तावित जनपद दौरे को लेकर प्रशासन ने अधूरे पड़े अमृत सरोवरों की सुध ली है। डिप्टी सीएम के कार्यक्रम में गौना अमृत सरोवर का निरीक्षण करने की संभावनाएं अधिक है। इस कारण प्रशासन इस अधूरे पड़े अमृत सरोवर को पूर्ण करवाने में तेजी से जुटा हुआ है।
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जनपद में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का दौरा 29 सितंबर को प्रस्तावित है। उनके कार्यक्रम में अमृत सरोवर निरीक्षण करना भी तय माना जा रहा है। डिप्टी सीएम के इस कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन अमृत सरोवरों की दशा सुधारने में लग गया है। प्रशासनिक सूत्रों की माने तो उन्हें गौना अमृत सरोवर दिखाया जाएगा। चूंकि डिप्टी सीएम का कार्यक्रम नाराहट में है और वहां से गौना अमृत सरोवर नजदीक और हाइवे के किनारे है। आबादी से बाहर होने के कारण वीआईपी मूवमेंट में भी कोई परेशानी नहीं होगी। इस अमृत सरोवर की दशा सुधारने में प्रशासन जुट गया है। सरोवर के अधूरे कामों को पूरा कराने के लिए ग्राम्य विकास व पंचायतीराज विभाग की टीमें जुट गई हैं। अमृत सरोवर में अभी तक मनरेगा के माध्यम से करीब साढ़े चार लाख रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। लेकिन मौके पर काम दिखाई नहीं दे रहा है। तालाब का फुट-वे भी तैयार नहीं है। जिसको पूरा करने के लिए अब पेवर ब्रिक्स लगाए जाने की कवायद शुरू हो गई है। अन्य सौंदर्यीकरण के कामों में भी तेजी लाई जा रही है। मुख्य विकास अधिकारी और डीसी मनरेगा निरंतर कार्य की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं।
30 लाख रुपये से बन रहा अमृत सरोवर
ग्राम गौना में निर्मित कराए जा रहे अमृत सरोवर की लागत करीब तीस लाख रुपये है। जिसमें मनरेगा से करीब पच्चीस लाख रुपये है। मनरेगा में मजदूरी के करीब सत्रह लाख रुपये और आठ लाख रुपये मेटेेरियल के लिए आरक्षित किया गया है। करीब पांच लाख रुपये राज्य वित्त से स्वीकृत किया गया है।
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जनपद के अन्य अमृत सरोवर भी पड़े अधूरे
जनपद में मनरेगा व राज्य वित्त से अमृत सरोवर बनाए जा रहे हैं। 15 अगस्त को जनपद के सभी आधे अधूरे अमृत सरोवरों पर ध्वजारोहण जोर-शोर से कर दिया गया था। जबकि धरातल पर इन अमृत सरोवरों की हकीकत कुछ और ही है। सूत्रों के अनुसार अधिकांश अमृत सरोवर अधूरे पड़े हुए हैं। कहीं सिर्फ खोदाई हो पाई तो कहीं पर सिर्फ तालाब के बंध का कुछ हिस्सा ही बन पाया है। लेकिन निर्देशों का पालन करने के लिए इन अधूरे अमृत सरोवरों पर ध्वजारोहण कर दिया गया।
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