संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर-महरौनी। कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पडवां में मंगलवार को पत्नी के फंदे से लटक कर जान देने पर पुलिस को देख घबराए पति की हार्टअटैक से मौत हो गई। प्रशासन ने रात में ही दंपती का पोस्टमार्टम कराने के बाद बुधवार सुबह दोनों शव का अंतिम संस्कार करा दिया। माता पिता की चिता को जब उसके आठ वर्षीय दिव्यांग पुत्र ने आग लगाई तो वह फफक कर रो पड़ा। यह नजारा देख मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
ग्राम पडवां के कुशवाहा निवासी छुट्टन कुशवाहा अपने परिवार के साथ कच्चे मकान में निवास करता था। मंगलवार देर शाम उसकी पत्नी सोना (25) ने किसी बात को लेकर घर की म्यारी (कच्चा कमरा) से साड़ी से लटक कर जान दे दी थी। जबकि, छुट्टन घर में दवा खाकर लेटा था। पत्नी के नजर न आने पर घर के आंगन में खेल रही अनामिका (5) से मां को बुलाने को उसने कहा तो अनामिका म्यारी में उसे बुलाने पहुंची तो उसने मां का शव फंदे से लटके देखा तो चीख पड़ी। लड़की के चिल्लाने की आवाज सुन छुट्टन वहां पहुंचा और उसने गले में रस्सी बांधे लटक रही सोना को किसी तरह से उतारा। उसकी चीख-पुकार सुन परिवार के अजय कुशवाहा, राजधर कुशवाहा, प्रतिपाल, अनंतराम आदि उसे निजी वाहन से लेकर तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महरौनी पहुंचे, जहां डॉक्टर ने सोना को मृत घोषित कर दिया।
अस्पताल अधीक्षक की सूचना पर पुलिस उपाधीक्षक आरके मिश्रा व कोतवाली प्रभारी अशोक कुमार पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और पति छुट्टन से पूछताछ करने लगे। इसी दौरान छुट्टन बेहोश होकर गिर पड़ा। डॉक्टर ने तत्काल उसकी जांच की तो वह मृत मिला। डॉक्टर के मुताबिक उसकी हार्टअटैक से मौत हुई थी। मामला तूल न पकड़ ले, इसको लेकर उच्चाधिकारियों को घटना की सूचना देने के साथ ही पुलिस ने देर रात दोनों शव पोस्टमार्टम को भेज दिए। प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद रात करीब दो बजे दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया गया।
-दो बच्चों के सिर से उठ गया माता-पिता का साया
परिजनों ने बताया कि छुट्टन के दो बच्चों में बेटी अनामिका (5) व बेटा देव (8) है। देव बचपन से ही दिव्यांग था। इसे लेकर माता पिता काफी परेशान रहते थें, क्योंकि उनकी आर्थिक स्थिति भी खराब थी, जिस कारण कहीं बाहर उपचार नहीं करा सके। दोनों बच्चों के सिर से माता और पिता का साया उठ जाने से उनका रो-रोकर बुरा हाल था।
एक एकड़ खेती से करता था परिवार का गुजारा
एक एकड़ खेती के मालिक जगु कुशवाहा के तीन पुत्रों में छुट्टन सबसे छोटा था। आर्थिक तंगी के चलते सभी भाई मेहनत मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते थे।
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पत्नी के आत्महत्या करने के बाद पति की तबीयत खराब हो गई थी, जिससे उसकी मौत हो गई। दोनों का पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों ने उनका अंतिम संस्कार कर दिया।-आरके मिश्रा, सीओ महरौनी
मृतक को आपदा से राहत नहीं दी जा सकती है। उसके नाम खेती होने पर उसे कृषि बीमा से क्लेम मिल सकता है। आरती सिंह, आपदा विशेषज्ञ