सैदपुर (ललितपुर)। उपजिलाधिकारी मड़ावरा ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल में तैनात ज्यादातर कर्मचारी गायब मिले तो कुछ अवकाश पर पाए गए। स्वास्थ्य केंद्र में जगह-जगह गंदगी मिली। तीमारदारों ने बताया कि मोमबत्ती की रोशनी में प्रसव कराए जाते हैं।
एसडीएम एसके पाल ने स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। इस दौरान स्वास्थ्य केंद्र में जगह-जगह गंदगी पाई गई। प्रसव कक्ष समेत अन्य कमरों में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं मिली, मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि बिजली नहीं होने पर जनरेटर नहीं चलाया जाता। तीमारदारों को मोमबत्ती जलाकर स्वयं प्रकाश का इंतजाम करना पड़ता है।
यहां तक कि कई बार प्रसव भी मोमबत्ती के उजाले में कराए जाते हैं, जबकि अस्पताल में इंवर्टर स्थापित है।
30 पलंग के अस्पताल में कोई भी मरीज भर्ती नहीं पाया गया। परिसर में मरीजों और उनके तीमारदारों को पीने के पानी के लिए हैंडपंप के अलावा अन्य कोई संसाधन उपलब्ध नहीं मिला, आगजनी जैसी दुर्घटनाओं से बचाव के लिए अग्निशमन व्यवस्था सही नहीं मिली।
साफ-सफाई, सार्वजनिक महिला प्रसाधन और शौचालय भी सही नहीं पाए गए। मरीजों के तीमारदारों को रुकने के लिए बनाए गए रैनबसेरा का उपयोग स्टोर रूम के रुप में किया जा रहा था, जिसमें कबाड़ और अन्य सामान भरा पाया गया। इमरजेंसी वार्ड में तैनात चिकित्सक डा. विशाल पाठक अवकाश पर थे। एक्स-रे कक्ष भी कई दिनों से बंद पाया गया।
एनआरसी में 4 बच्चे भर्ती पाए गए, संविदा स्टाफ नर्स मेघा कौशिक तीन दिन से अनुपस्थित चल रही थीं, तो ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर प्रियंक तिवारी बिना किसी आदेश के गायब मिले। उपस्थिति रजिस्टर पर उनके हस्ताक्षर भी अंकित नहीं थे। एमसीटीएस अमित तिवारी के भी हस्ताक्षर अंकित नहीं पाए गए। फार्मास्टि अशोक कुमार, लैब सहायक रामबिहारी, आईसीटीसी बालकिशन, डॉ. नेहा जोशी समेत अस्पताल के अधिकतर कर्मचारी अवकाश पर होना बताए गए।
ग्राम तिसगना निवासी ग्रामीणों ने प्रसव के नाम पर लाभार्थियों से सुविधा शुल्क लिए जाने का आरोप लगाते हुए बताया कि दवा वितरण कक्ष में तैनात कर्मचारियों द्वारा लोगों से अभद्र व्यवहार किया जाता है। मुआयना के बाद उपजिलाधिकारी ने चिकित्सा अधीक्षक डा. एसके गुप्ता को हिदायत देते हुए कहा कि स्वास्थ्य केंद्र में साफ-सफाई, प्रकाश, शौचालय आदि के बेहतर इंतजाम किए जाएं।
अधिकतर कर्मचारियों के अवकाश पर होने पर संदेह प्रकट करते हुए कहा कि आकस्मिक अवकाश के लिए रखे प्रार्थना पत्र की सत्यता भी संदेहास्पद है। एक ही दिन में इतने कर्मचारियों का अवकाश स्वीकृत करना भी ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि अधिकांश स्वास्थ्य उपकेंद्र नियमित संचालित नहीं हो रहे हैं, वहां तैनात एएनएम भी निवास नहीं करती हैं। इस कारण गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए मड़ावरा समेत अन्य स्थानों पर जाना पड़ता है।
बाल विकास परियोजना कार्यालय देखा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निरीक्षण के बाद एसडीएम ने बाल विकास परियोजना कार्यालय का मुआयना किया गया। इस दौरान दो सुपरवाइजर मौजूद मिलीं। पोषाहार भंडार कक्ष व परिसर में साफ-सफाई पर्याप्त नहीं पाई गई। सीडीपीओ के अन्यत्र चले जाने के कारण कार्यालय में ताला पड़ा था।
इस कारण स्टॉक रजिस्टर, भ्रमण पंजिका समेत अन्य दस्तावेज निरीक्षण के लिये उपलब्ध नहीं हो सके। एसडीएम ने मौजूद सुपरवाइजर को चेतावनी दी ़कि हर हाल में सभी आंगनबाड़ी केंद्र नियमित खुलने चाहिए। केंद्र पर पोषाहार समेत पका- पकाया गर्म भोजन भी मानकों के अनुरूप वितरित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पोषाहार का उठान समय से पूरा किया जाए।