ललितपुर। शिक्षकों को तैयार करने वाले जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान (डायट) का सूचना पटल अभी तक अपडेट नहीं हो सका है। विडंबना यह है कि डायट चरखारी के प्राचार्य का नाम ललितपुर में एक वरिष्ठ प्रवक्ता के रूप में चल रहा है। यही नहीं, विद्यालयों की संख्या कम दर्शाए जाने से भ्रम की स्थिति बन गई है। लेकिन, इसके बाद भी विभागीय अफसरों का ध्यान इस ओर नहीं है।
डायट में शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इस दौरान प्रशिक्षुओं को ललितपुर की भौगोलिक जानकारी देने के साथ-साथ पाठ्यक्रम की शिक्षा दी जाती है। लेकिन, डायट के सूचना पटल को अपडेट नहीं करने से प्रशिक्षुओं में भ्रम की स्थिति है। डायट ललितपुर में दो प्रवक्ता ही रह गए हैं।
इनमें एक प्राचार्य का पद संभाले हैं तथा दूसरे ने शिक्षण का जिम्मा ले रखा है। दिलचस्प बात यह है कि ललितपुर एक दृष्टि में अध्यापक, स्कूल, तहसील, ब्लाक, ग्राम पंचायत, न्याय पंचायत, विधानसभा, संसदीय क्षेत्र, ग्राम शिक्षा समितियां, नगर शिक्षा समितियां, साक्षरता, जनसंख्या और जनपद का क्षेत्रफल आदि दर्शाया गया है। इनमें से अधिकांश सूचनाएं पुरानी हो गई हैं। जिले की ग्राम पंचायतों की संख्या, जनसंख्या और तहसीलों की संख्या बढ़ गई हैं।
इसके अलावा वरिष्ठ प्रवक्ता एसके सक्सेना के चरखारी डायट प्राचार्य बनने के बाद भी ललितपुर के सूचना पटल में मौजूद दिखाए जा रहे हैं। जिस विभाग को भावी पीढ़ी को शिक्षित करने का जिम्मा दिया गया है, उस विभाग में भ्रामक सूचनाएं शिक्षकों को पढ़ाई जा रही हैं। ऐसे में नन्हें-मुन्ने बच्चे क्या सीखेंगे। इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
बीआरसी पर भी सूचनाओं का हाल-बेहाल
ब्लाक संसाधन केंद्रों पर भी परिषदीय और निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों की संख्या आदि सूचना सही नहीं की गई हैं। विभिन्न ब्लाक केंद्रों पर पुरानी सूचनाओं के बोर्ड टंगे हैं, जो विभागीय अफसरों की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं।