ललितपुर। नगर में खाली पड़े प्लाटों पर कचरा डाला जा रहा है। इससे शहर में गंदगी की समस्या हल नहीं हो रही है। समस्या के समाधान के लिए नगर पालिका ने ऐसे खाली प्लाट मालिकों की सूची तैयार कराने का निर्णय लिया है।
सूची तैयार होने के बाद प्लाट स्वामियों और वहां पर कचरा फेंकने वालों के चालान किए जाएंगे। नगर पालिका सीमा का पिछले छह सालों में तेजी से विस्तार हुआ है। बहुत से क्षेत्र जो खाली पड़े थे, अब वहां पर मकान तैयार हो गए हैं। नगरीय सीमा बढ़ने से नगर पालिका के सामने सफाई, मार्ग प्रकाश और संपर्क मार्ग की जिम्मेदारियां बढ़ती चली जा रही हैं।
नगरीय सीमा में बने भवनों, सरकारी चिकित्सालय, प्राइवेट नर्सिंग होम, फल और सब्जी मंडी, नझाई बाजार, लोहा पीतल बाजार, सराफा बाजार, जगदीश मार्केट सहित अन्य सभी स्थानों से लगभग 80 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। कचरा डालने के लिए दो दर्जन से अधिक स्थायी व अस्थायी कचरा घर बने हुए हैं।
तीन सैकड़ा हाथ कचरा गाड़ियों की सहायता से संकरी और तंग गलियों का कचरा एकत्रित कर निर्धारित स्थान पर पहुंचाया जाता है। इसके बाद ट्रैक्टरों के माध्यम से निर्धारित डंपिंग साइट रामनगर में कचरा पहुंचाया जाता है।
नगरीय सीमा में डेढ़ सैकड़ा छोटे कचरा बाक्स और 50 से अधिक बड़े कचरा बाक्स रखे हुए हैं। इसके बाद भी भवन स्वामी, दुकानदार, फल एवं सब्जी विक्रेता निर्धारित स्थान पर रखे इन कचरा बाक्स में कचरा नहीं डाल रहे हैं। वहीं, प्लाट स्वामी खुला प्लाट छोड़ देते हैं, जिससे आसपास के लोग सुविधा के अनुसार प्लाट पर ही कचरा डाल दे रहे हैं।
नगर पालिका के नियमों के अनुसार नगरीय सीमा में खाली प्लाट को बिना बाउंड्रीवाल के नहीं डाला जा सकता है, क्योंकि इससे गंदगी को बढ़ावा मिलता है। इस समस्या समाधान के लिए नगर पालिका कचरा फैलाने वालों की सूची तैयार करा रही है, जिसमें बाहर कचरा फेंकने वाले भवन स्वामी, फल और सब्जी विक्रेता, प्राइवेट नर्सिंग होम व खाली प्लाट के मालिक शामिल किए जाएंगे।
इसके बाद संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ चालान किया जाएगा। सूची बनाने की जिम्मेदारी वार्ड स्वास्थ्य नायकों को दी गई है। हालांकि, पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सफाई निरीक्षक भी सूची का सत्यापन और भौतिक निरीक्षण करेंगे।
कंटेनर के बाहर फैला रहता कचरा
नगरीय सीमा में कई स्थानों पर कचरा कंटेनर रखे होने के बाद भी इसके आसपास कचरा फैला दिखाई देता है। इस संबंध में नगरवासी भी विचार नहीं करते हैं। कई बार तो दूर से ही कचरा फेंक दिया जाता है। ऐसी स्थिति में कई बार नालियां चोक हो जाती हैं, जिससे जलभराव की स्थिति खड़ी हो जाती है। इसके बाद सिल्ट निकालकर समस्या दूर की जाती है।