पाली। नवरात्र पर आस्थाओं का ऐसा दौर चलता है कि जिसे देख हर कोई दंग रह जाता। ग्राम करमरा में एक साधक अपने शरीर पर जवारे उगाकर साधना में लगा है, जिसे देखने के लिए श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
नवरात्र पर चहुंओर देवी की आराधना हो रही है। सूर्य उदय से लेकर सूर्यास्त के बाद तक शक्ति की भक्ति में वातावरण धर्ममय चल रहा है। विंध्याचल की वादियों में विराजीं बड़ी भवानी माता मंदिर और श्री हजरिया विश्वनाथ महादेव मंदिर में विराजीं छोटी माता के दरबार में श्रद्धालुओं की भीड़ लग रही है। बुंदेली परंपरा के अनुसार श्रद्धालु मंदिरों और अपने घरों में जवारों की स्थापना करते हैं। जवारे खुशहाली का प्रतीक होते हैं, यदि जवारे बेहतर तरीके से उगते हैं तो माना जाता है कि आने वाली फसल अच्छी होगी। ग्राम करमरा निवासी 50 वर्षीय मोहन लोधी ने आस्था की इसी कड़ी में नवरात्र के पहले दिन से अन्न-जल के साथ अपनी दैनिक दिनचर्या त्याग दी और शरीर पर जवारे बो लिए। नौ दिन तक वह बैठेगा भी नहीं। उसने अपनी बाहों पर भी जवारे बोए हैं। जिससे हाथ ऊंचे हवा में रहते हैं। इस साधक की साधना देखकर लोग उसके तप को नमन कर रहे हैं।
ऋतु संधियों में व्रत जरूरी
नवरात्र में मान्यता रखने वाले बुजुर्ग बताते हैं कि ऋतु संधियों में अक्सर बीमारियों को बढ़ावा मिल जाता है। ऐसे में शरीर को स्वस्थ रखने के लिए, तन और मन को निर्मल रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया ही नवरात्र है। इसमें सात्विक भोजन जरूरी है। इसके सेवन से शरीर, मन व वचन शुद्ध हो जाता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी लग रही भीड़
कस्बा बालाबेहट के वरवासन माता मंदिर में दूरदराज से श्रद्धालु हाजिरी लगा रहे हैं। बुंदेलखंड की वैष्णो माता के रूप में पहचान बना रहे बंगरिया के डोंगरा गांव के मंदिर में देवी के दर्शनों को भीड़ लग रही है। पर्वत के शिखर पर बने इस मंदिर परिसर से धरातल का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है। लोग यहां सेल्फी लेते देखे जा सकते हैं। इसके साथ ही ग्राम बम्होरी, बछलापुर, बंट, भौंता आदि ग्रामों में नवरात्र पूरी आस्था के साथ मनाया जा रहा है। नवरात्र के अंतिम दिन जवारों की शोभायात्रा निकलेगी।