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साल गुजरा, नहीं वसूल सके एक रुपया

Sun, 26 Feb 2017 01:18 AM IST
lalitpur
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नगर पालिका का खजाना खाली होने के कारण बीते दो वर्षों से शहर के विकास का पहिया लगभग पूरी तरह से थमा हुआ है। विकास कार्य नहीं होने के साथ-साथ नगर पालिका अपने ठेकेदारों की करोड़ों रुपये की कर्जदार भी बन गई है। ऐसे हालतों से निपटने के लिए नगर पालिका अपनी विभागीय आय बढ़ाने के बदले हाथ पर हाथ रखे शासन से आर्थिक सहायता मिलने की आस लगाए हुए बैठी हुई है। शहर में संचालित प्राइवेट नर्सिंग होम, पैथोलॉजी, क्लीनिक व एक्सरे सेंटरों से, फुटपाथी दुकानदारों, फेरी लगाने वालों आदि के लाइसेंस जारी करके नगर पालिका शुल्क वसूलती है, लेकिन अब तक लाइसेंस शुल्क वसूली तो दूर नगर पालिका इनका लाइसेंस तक जारी नहीं कर पाया है। इससे विभाग को राजस्व की भारी क्षति हो रही है।       
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पूर्व में नगर पालिका नगरीय क्षेत्रों में संचालित प्राइवेट मेडिकल सेंटरों से लाइसेंस शुल्क वसूलती थी। लेकिन प्राइवेट मेडिकल सेंटर संचालकों के विरोध के कारण यह मामला प्रदेश स्तर पर पिछले कुछ वर्षों से मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन था। वर्ष 2014 में यह फैसला नगर पालिका के पक्ष में आ गया था और इसके बाद नगर पालिका क्षेत्र में संचालित प्राइवेट मेडिकल सेंटरों से लाइसेंस शुल्क लागू करना शुुरू कर दिया था। शासन द्वारा प्राइवेट पैथोलॉजी, नर्सिंग होम, अस्पताल, क्लीनिक व एक्सरे सेंटरों के लिए अलग-अलग लाइसेंस शुल्क निर्धारित किया गया है। शासन ने प्राइवेट पेथोलॉजी का लाइसेंस शुल्क 667 रुपये वार्षिक, एक्सरे सेंटर का शुल्क 1,334 रुपये, नर्सिंग होम का 1,334 रुपए, प्राइवेट क्लीनिक का 2 हजार रुपए व निजी अस्पताल का लाइसेंस शुल्क 1,334 रुपए वार्षिक निर्धारित किया गया है। नगर पालिका ने शासन द्वारा निर्धारित लाइसेंस शुल्क की वूसली के लिए सीएमओ कार्यालय में दर्ज रजिस्टेंशन सूची के आधार पर एक निजी अस्पताल, पांच नर्सिंग होम, 92 प्राइवेट क्लीनिक, पांच एक्सरे सेंटर व 11 पैथोलॉजी सेंटर को लाइसेेंस वसूली के लिए नोटिस दिया था। यह नोटिस नगर पालिका ने पूरे एक वर्ष पूर्व वर्ष 2016 के फरवरी माह में जारी किए थे। इस दौरान कुछ मेडिकल सेंटरों द्वारा आपत्ति उठाई गई थी, इसके बाद बीते इस एक साल में न तो नगर पालिका उन आपत्तियों का कोई निस्तारण कर पाई है और न ही अब तक लाइसेंस शुल्क के नाम पर एक रुपया वसूल पाई है। वहीं नगर पालिका शहर में संचालित शराब की दुकानों से भंी लाइसेंस शुल्क वसूलने में पीछे ही है।      
      
कब होंगे फुटपाथी और फेरी लगाने वालों के लाइसेंस जारी      
शहर सीमा में एक हजार से अधिक फुटपाथी दुकानदार हैं तो शहर के मुख्य मार्ग के किनारे बने फुटपाथों पर अस्थाई दुकानें व हाथ ठेला लगाकर व्यापार करते हैं। इसी तरह सैकड़ों छोटे व्यापारी हाथ ठेला व साइकिल व अन्य साधनों से शहर में फेेरी लगाकर व्यापार करते हैं। इन फुटपाथी दुकानदारों व फेरी लगाने वाले व्यापारियों को नगर पालिका द्वारा चिह्नित करके लाइसेंस जारी किए जाने थे। दो वर्षों से अधिक समय बीत गया है, लेकिन नगर पालिका इन फुटपाथियों के लाइसेंस जारी करना तो दूर अब तक इनका ब्योरा भी नहीं जुटा पाई है। इससे नगर पालिका को लाखों रुपये वार्षिक राजस्व की क्षति हो रही है। इसके अलावा हाईकोर्ट और शासन के निर्देशों को भी ठेंगा दिखाया जा रहा है, इससे शहरवासियों व राहगीरों को भी दिक्कतों का सामना करना पढ़ रहा है। क्योंकि हाईकोर्ट व शासन के निर्देशन के अनुसार नगर पालिका इन फुटपाथी व्यापारी से लाइसेंस शुल्क वसूलने के बदले उचित स्थल उपलब्ध कराए जाने थे, जिससे शहर के मुख्य मार्गों के किनारे बने फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त बनाया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। नगर पालिका की लेटलतीफी के कारण विभाग को राजस्व की क्षति हो रही है और साथ ही सड़कों के किनारे काबिज अतिक्रमण के कारण नागरिकों व राहगीरों को दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है।      
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नहीं मिल सका ई-रिक्शा का लाभ      
शहर में संचालित होने वाले रिक्शा चालकों को नगर पालिका पूर्व में लाइसेंस जारी करती थी, लेकिन कुछ बर्षों से नगर पालिका ने रिक्शा चालकों के लाइसेंस बनाना बंद कर दिए थे। विभाग की इस लचर कार्यप्रणाली के कारण शहर के रिक्शा चालकों को प्रदेश सरकार द्वारा निशुल्क वितरित किए गए ई-रिक्शा का लाभ नहीं मिल सका है। शासन ने इस योजना का लाभ लेने वाले लाभार्थियों को चिह्नित करने के लिए नगर पालिका से वर्ष 2014 के लाइसेंस धारी रिक्शा चालकों के रिकार्ड मांगे थे, लेकिन विभाग में रिक्शा चालकों को रिकार्ड शून्य होने के कारण इस योजना का लाभ स्थानीय रिक्शा चालकों को नहीं मिल सका है।

लाइसेंस बनवाने व शुल्क अदा करने के लिए मेडिकल सेंटर संचालकों को पूर्व में नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन उनके द्वारा आपत्ति उठाई गई थी। जल्द की इन आपत्तियों का निस्तरण कराकर लाइसेंस शुल्क वसूला जाएगा। इसके अलावा फुटपाथी दुकानदारों का ब्योरा भी विभागीय कर्मियों द्वारा जुटाया जा रहा है, काम में तेजी लाने के लिए कर्मियों को निर्देश दिए जाएंगे। आने वाले नवीन वित्तीय वर्ष तक लाइसेंस जारी करके शुल्क की वसूली शुरू कर दी जाएगी।      
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राकेश कुमार      
अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका ललितपुर।
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