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कंपोस्ट खाद के लिए जागरुकता अभियान चलाएगी नगर पालिका

Sat, 25 Feb 2017 12:41 AM IST
lalitpur
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administration - फोटो : demo pic
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ललितपुर। शहरी क्षेत्रों में घरों, होटलों व विवाह घरों आदि से निकलने वाले कंपोस्ट कचरे के निस्तारण के लिए अब तक नगर पालिका ने कोई व्यवस्था नहीं की है, जिससे दिनों दिन शहर का डंपिंग ग्राउंड(टिचिंग ग्राउंड) कचरे के ढ़ेरों से भरता जा रहा है। जल्द ही नगर पालिका द्वारा शहर वासियों को कंपोस्ट कचरे को खाद के रुप में उपयोग करने के लिए प्रचार के माध्यम से प्रेरित किया जाएगा और जागरुकता अभियान चलाकार नागरिकों को कचरे से कंपोस्ट खाद बनाने की विधि बताई जाएगी।      
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भारत सरकार द्वारा देश को साफ व स्वच्छ बनाने के लिए स्वच्छ भारत मिशन (अर्बन) कार्यक्रम के तहत तमाम योजनाएं व अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में अब भारत सरकार कंपोस्ट बनाओ- कंपोस्ट अपनाओ अभियान चला रही है। शहरी विकास मंत्रालय भारत सरकार ने नगर पालिका को निर्देश जारी करके शहर में यह अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इस अभियान के तहत आम नागरिकों को घरों से निकलने वाले कंपोस्ट कचरे को अन्य कचरों के साथ फेंकने की जगह उक्त कचरे से कंपोस्ट खाद बनाने और फिर उसका उपयोग करने के लिए प्रेरित करेगी और खाद बनाने की विधि के बारे में जानकारी देगी। शासन के निर्देशानुसार यह अभियान नगर पालिका द्वारा आम नागरिकों को, विवाह घरों में, होटल, रेस्टोरेंट, कालेजों, कालोनियों आदि क्षेत्रों में चलाया जाएगा। इन जगहों पर नगर पालिका के अधिकारी शिविर लगाकर व अन्य माध्यमों से लोगों को जागरुक करेंगें व कंपोस्ट खाद बनाने के तरीके बताएंगे। घरों के साथ शादी समारोह, होटलों, शादी-विवाह घरों व रेस्टोरेंट आदि समारोह स्थलों पर समारोह के दौरान भारी मात्रा में खाना बच जाता है और साथ ही सब्जी व फलों के छिलके आदि भी बच जाते हैं, इस कचरे को फेंकने की जगह एकत्रित करके कंपोस्ट खाद बनाए और उसका उपयोग अपने प्रतिष्ठान परिसर में बने बगीचे आदि में कर सकते हैं। वहीं शासनादेेश के अनुसार नगर पालिका कंपोस्ट बनाओ कंपोस्ट अपनाओ अभियान के संबंध में शहर के मुख्य चौराहों सार्वजनिक स्थलों आदि स्थानों पर बैनर, पोस्टर व होर्डिंग लगवा कर प्रचार-प्रसार किया जाएगा।      
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खुद नहीं हुुए जागरुक, दूसरों को कैसे करेंगे      
शासन के निर्देश पर नगर पालिका जनता को घरों से निकलने वाले कंपोस्ट कचरे के निस्तरण के लिए खाद बनाने और उसका उपयोग करने के लिए जागरुक करके प्रेरित करने का काम करेगी, लेकिन सवाल यह है कि नगर पालिका अब तक खुद इस कचरे के निस्तारण को लेकर जागरुक नहीं है तो फिर वह दूसरों को जागरुक  कैसे करेंगे। शहर में हर रोज करीब पांच मैट्रिक टन कचरा निकलता है। इसमें कंपोस्ट खाद बनाने वाला गीला कचरा व प्लास्टिक, कांच आदि पदार्थ मिश्रित सूखा कचरा शामिल है। शहर को साफ व स्वच्छ बनाने वाली नगर पालिका ने अब तक खुद ही कंपोस्ट कचरे से खाद बनाने का प्रयास नहीं किया है। न तो शहर में अलग-अलग कचरा निस्तरण करने के लिए डस्टबिन हैं और न हीं नगर पालिका द्वारा अलग-अलग कचरे का उठाने और उसका निस्तरण करने के लिए जगह है। मुहल्ला रामनगर में करीब तीन एकड़ जमीन पर बना नगर पालिका का इकलौता व वर्षों पुराना डंपिग स्थल है, जो कचरा निस्तरण नहीं हो पाने के कारण बड़े-बड़े ढेर में तबदील होता जा रहा है। गौरतलब है कि नगर पालिका बीते कुछ माह पूर्व ही करीब 70 लाख रुपये की लागत से दस कवर्ड आपे गाड़ियों को डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए खरीदा था, लेकिन इसमें भी गीला व सूखा कचरा कलेक्शन के लिए अलग-अलग व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा लाखों रुपये की लागत से प्लास्टिक के करीब 80 डस्टबिन भी खरीदे हैं, जो एक ही रंग हैं ही साथ ही बीते कई महीनों से विभाग के स्टोर में पड़े धूल फांक रहे हैं। इससे नगर पालिका की जागरुकता का पता चलता है। अब यह भी देखना दिलचस्प होगा कि नगर पालिका शहरवासियों को कंपोस्ट खाद के लिए जागरुक करने में कितना सफल होती है।
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