ललितपुर। गणतंत्र दिवस का जश्न ‘अमर उजाला’ इस बार खास अंदाज में मना रहा है। इसी के तहत बुधवार को सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज महरौनी मेें ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें छात्राओं ने बेटी बचाओ का संदेश दिया।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे कुंअर सिंह ने कहा कि समाज में बेटियां किसी से पीछे नहीं हैं। बेटियां अपने माता-पिता का नाम रोशन कर रहीं हैं। शैलेंद्र श्रीमाली ने कल्पना चावला, सानिया मिर्जा, मैरी कॉम, साइना नेहवाल जैसे कई उदाहरण दिए। प्रतियोगिता में छात्राओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ विषय पर छात्राओं ने पक्ष-विपक्ष में अपने-अपने विचार रखे। निर्णायक की भूमिका में विद्यालय के आचार्य शैलेंद्र श्रीमाली, कुंअर सिंह, राधेलाल, संतराम, अंजली और सीता रहीं। उन्होंने प्रतियोगिता में भाग लेेने वाली छात्राओं में से तीन छात्राओं का चयन किया। इसमें क्रमश: प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पर आकांक्षा बुंदेला, आशिया बानो और अनुशंसा लिटौरिया रहीं। अमर उजाला ने छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। आयोजन का उद्देश्य बच्चों को बाल अधिकार के बारे में जानकारी प्रदान कर बाल-विवाह, कन्या भ्रूण हत्या, उत्पीड़न की रोकथाम कर बालिकाओं को अपने आत्मरक्षा के लिए प्रोत्साहन करना रहा।
प्रतियोगिता में अंचल पटेल, आशिया बानो, आकांक्षा बुंदेला, सुजाता साहू, श्रद्धा रिछारिया, ऐश्वर्या मलैया, सेजल रिछारिया, अनुशंसा लिटौरिया, साक्षी साहू ने प्रतिभाग किया। इसमें छात्राओं ने बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ अभियान के बारे में पक्ष और विपक्ष में अपने विचार रखे।
बहुत रह लिया अबला बनकर, अब हमसे रहा नहीं जाता। मर्यादित सीमा शब्दों की, कुछ ज्यादा कहा नहीं जाता। आखिर कब तक कैद रहेंगे हम अपने ही घर में, जुल्म बढ़ रहे दुनिया के अब हमसे और सहा नहीं जाता।
- आकांक्षा बुंदेला
गणतंत्र का जश्न पर अमर उजाला द्वारा आयोजित बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर अपने विचार प्रकट करने का अवसर मिला। ये हमारे लिए गौरव की बात है।
- सुजाता साहू
बेटी को कमजोर समझाना, ये हमारी सबसे बड़ी कमजोरी है। नारी अबला नहीं सबला है। हमें कभी किसी से कमजोर नहीं मानना चाहिए।
- साक्षी साहू
प्रतियोगिता में अपने विचार प्रस्तुत कर बेटियों के सम्मान के लिए विचार रखे। ये हमारे लिए सुखद अनुभूति रही।
- श्रद्धा रिछारिया
ये हमारे लिए बहुत ही हर्ष की बात है कि अमर उजाला ने आज हमें अपनी बात रखने के लिए मंच दिया। ऐसे अवसर मिलते रहने चाहिए।
- ऐश्वर्या मलैया
बेटी भार नहीं आभार हैं। बेटी कुदरत की करुण पुकार हैं। बेटी है तो कल है, बेटी है तो हर पल है। आओ बेटी के सम्मान में दुनिया में अलख जगाएं। बेटी बचाएं, बेटी पढ़ाएं।
- सेजल रिछारिया
आज भी आमतौर पर बेटा- बेटी में फर्क हमारे समाज में हर घर की समस्या है। चाहे प्रेम विवाह हो, कॅरियर या फिर कोई और विषय बेटियों को बेटों से कम ही देखा जाता है। ऐसे मे जरूरत है धरातल पर उतरने की और वास्तविकता में कुछ करने की।
- अनुशंसा लिटौरिया
हमारे कॉलेज मैं बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ विषय पर वाद विवाद प्रतियोगिता हुई। इससे बहुत कुछ सीखने को मिला। ऐसी प्रतियोगिताएं होती रहनी चाहिए।
- अंचल पटेल
आज जरूरत है, भ्रूण हत्या के अलावा जन्मी बेटियों के लिए कुछ करने की, जिसके जरिये वे आगे बढ़ सकें। अन्यथा बेटी बचाओ बेटी पढाओ विषय सार्थक नहीँ हो पायेगा, क्योंकि बेटियां ना तो स्टेज शो से बचेंगी ना पढेंगी। इनको बचाने और पढाने के लिए जमीनी शुरुआत जरूरी है।
- आशिया बानो