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बेटियां घर परिवार का गौरव: आर्यिका

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अमर उजाला ब्यूरो
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ललितपुर। आर्यिका सृष्टिभूषण माता ने कहा कि जीवन में धर्म ही आत्मशक्ति का सशक्त माध्यम है। व्यक्ति को मंदिर, धर्म के नाम पर नहीं लड़ना चाहिए। उन्होंने प्रेरक प्रसंग के माध्यम से कहा कि माता सीता को लोकोपवाद के कारण जंगल में छोड़ दिया गया, लेकिन उन्होंने तब भी धर्म को नहीं छोड़ा। वह रविवार को पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अटामंदिर में आयोजित श्रमण संस्कृति संस्कार शिविर में धर्मसभा को संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि संस्कार मात्र शब्दों में न हो, आचरण में झलकनी चाहिए। अंदर के रागद्धेष जितने घटेंगे उतने अच्छे संस्कार हो जाएंगे।माता पिता बेटी को ससुराल विदा करते समय सीख दें। ससुराल में मंगलकलश बनकर रहना न कि कलह बनकर। बेटियां घर परिवार का गौरव होती हैं जो पूरे परिवार को संस्कारित करती हैं। धर्मसभा का शुभारंभ आचार्य विद्यासागर महाराज, आचार्य विद्याभूषण सन्मतिसागर महाराज के सम्मुख श्रेष्ठी श्रेष्ठीजनों ने दीप प्रज्जवलित कर किया।
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शिविर में आर्यिका विश्वयश माता ने धार्मिक शिक्षण इष्टोपदेश के माध्यम से दिया। बालकों को धार्मिक शिक्षण विद्वानों द्वारा कक्षाओं में प्रदान किया जा रहा है। ग्रीष्मकाल में विद्वान दूरांचलों में संस्कार शिविर लगा रहे हैं। डॉ. आलोक मोदी, मुकेश शास्त्री के अतिरिक्त मंदिर प्रबंधक मोदी पंकज जैन, अशोक, अजय जैन, मनोज जैन, जिनेंद्र जैन, मनीश जैन आदि मौजूद रहे।
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श्रमण संस्कृति संस्थान शिक्षण शिविर में सीख रहे जैन धर्म की शिक्षा
ललितपुर। श्री अभिनंदनोदय तीर्थक्षेत्र में चल रहे शिविर की पाठशाला में अध्ययनरत बच्चों और जैन समाज के श्रावक, श्राविकाएं जैनधर्म के शास्त्रों का अध्ययन कर रहे हैं। संत शिरोमणि समाधिस्थ आचार्य विद्यासागर महाराज के ज्ञान, ध्यान, तप व साधना को विनयांजलि स्वरूप समर्पित श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर के तत्वावधान में आयोजित शिविर में विद्वानों ने बालबोध पूर्वार्द्ध व उत्तरार्द्ध, छहढाला, इष्टोपदेश, द्रव्यसंग्रह, तत्त्वार्थसूत्र, श्रावकाचार, सर्वार्थसिद्धि, जीवकांड एवं द्वादशवर्षीय पाठ्यक्रम से संबंधित विभिन्न विषयों की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। ब्यूरो
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