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शादी केे नाम पर राजस्थान में बेच आए युवती

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प्रशासन - फोटो : amar ujala
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ललितपुर। शादी के नाम पर गांव की एक लड़की को बेचने के मामले में मुख्य न्यायालय मजिस्ट्रेट की अदालत ने मध्यप्रदेश व राजस्थान के दो व्यक्तियों समेत तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
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थाना कोतवाली अंतर्गत एक ग्राम निवासी महिला ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की न्यायालय में दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि करीब चार वर्ष पूर्व ग्राम बुढ़वार निवासी जमुना पुत्र कोमल सहरिया, मध्यप्रदेश के थाना मालथौन अंतर्गत ग्राम डबडेरा निवासी जमना का बहनोई रामपाल उसके घर आए और बताया कि राजस्थान के ग्राम लुहरिया में एक लड़का मेहरबान पुत्र कालू सिंह उसकी पुत्री के योग्य है और वह अपनी लड़की की शादी उसी से कर दें। उन्होंने उसके पति को भी अपनी बातों में फंसाकर इसके लिए राजी कर लिया। इसके बाद जमना व रामपाल उसकी पुत्री को अपने साथ राजस्थान के जिला झालाबाड़ अंतर्गत ग्राम लुहरिया ले गए और वहीं मेहरबान के साथ विवाह करा दिया। तबसे से लेकर अब तक उसकी पुत्री को उक्त लोगों ने उसे घर वापस नहीं आने दिया।
जब इसके बारे में उसने जमना व उसके बहनोई से अपनी पुत्री के बारे में पूछताछ की तो कहा गया कि उसकी बिटिया खुश है। इसके बाद 19 जून 2018 को वह अपने पति के साथ जमना से अपने दामाद मेहरबान का पता लेकर अपनी बिटिया से मिलने राजस्थान के ग्राम लुहरिया गए तो पहले तो उक्त लोगों ने उसकी पुत्री से नहीं मिलने दिया। काफी मिन्नतों के बाद जब वे अपनी पुत्री से मिले तो उनकी पुत्री ने उसके साथ हो रहे शारीरिक व मानसिक शोषण की आपबीती सुनाई और बताया कि उसके पति मेहरबान व उसके परिजन उसे काफी मारते पीटते हैं और उसकी शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न करते हैं  हैं। इस पर जब उन्होंने दामाद मेहरबान से उलाहना दिया तो उसने बताया कि उसने उसकी पुत्री को दो लाख रुपया में जमना व उसके बहनोई रामपाल से सौदा करके खरीदा है और अब वह उनकी लड़की को मारें या वेश्यावृत्ति कराएं उनकी मर्जी है। इसके बाद उसने उसकी लड़की को बिना भेजे ही वहां से भगा दिया। इसके बाद गांव लौटकर 22 जून 2018 को उन्होंने जब उक्त जमना व उसके बहनोई के पास जाकर अपनी पुत्री को बेचने के बारे में पूछा व उलाहना दिया तो उक्त लोग आगबबूला होकर गालियां देने लगे और दो लाख में बेचने की बात बताई। साथ ही धमकी दी कि वह पुलिस में शिकायत करेंगे तो वे उन्हें जान से मार देंगे। जिस पर उसने थाना कोतवाली गए, लेकिन रिपोर्ट नहीं लिखी गई। जिस पर उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राम विलास प्रसाद की न्यायालय ने 14 फरवरी को उक्त मामले में थाना कोतवाली थानाध्यक्ष को प्रार्थना पत्र के तथ्यों के प्रकाश में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करके विवेचना कराने के आदेश दिए हैं।
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