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गैंगेस्टर में नौ को तीन-तीन वर्ष की कैद

Tue, 19 Jan 2016 12:27 AM IST
ब्यूरो
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ललितपुर। अपर सत्र न्यायाधीश लोकेश राय की अदालत ने ग्राम दैलवारा निवासी नौ अभियुक्तों को गैंगेस्टर एक्ट के अपराध का दोषी पाते हुए तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। सभी पर पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है।
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थाना प्रभारी निरीक्षक जगदीश सिंह ने 20 अप्रैल 2005 को कोतवाली में तहरीर दर्ज कराई थी कि वह उसी दिन कांस्टेबल रमेश चंद और अबध बिहारी के साथ शांति व्यवस्था के लिए गश्त कर रहे थे। वह दैलवारा पहुंचे ही थे कि गांव के व्यक्तियों ने बताया कि गांव के शिशुपाल सिंह का एक संगठित गिरोह है,

जिसमें गांव के पुष्पेंद्र सिंह, दिग्विजय सिंह, धर्मेंद्र सिंह, गजेंद्र सिंह, शिब्बू, राघवेंद्र सिंह, हरपाल और नरेंद्र सिंह नाजायज तरीके से आर्थिक व भौतिक लाभ अर्जित करते हैं। इन सभी पर पूर्व से हत्या, हत्या के प्रयास, चोरी, अमानत में खयानत जैसे आपराधिक मामले चल रहे हैं।
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गांव के लोगों को आए दिन डराने, धमकाने और भय के कारण कोई इनकी रिपोर्ट या शिकायत दर्ज नहीं कराता है। गांव में भय और आतंक का माहौल व्याप्त है।

थाना प्रभारी की तहरीर पर उक्त सभी नौ आरोपियों के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने उत्तर प्रदेश गिरोह बंद एवं समाज विरोधी क्रिया कलाप निवारण अधिनियम (गैंगेस्टर एक्ट) के तहत मामला दर्ज कर लिया था। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था।

सोमवार को अपर सत्र न्यायाधीश लोकेश राय ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों व दलीलों के आधार पर सभी नौ अभियुक्तों को गैंगेस्टर के अपराध का दोषी पाते हुए तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यही नहीं, सभी पर पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में दो माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।

हत्या के जुर्म में सजायाफ्ता हैं सभी अपराधी
सोमवार को न्यायालय द्वारा ग्राम दैलवारा निवासी जिन नौ अपराधियों को गैंगेस्टर एक्ट में सजा सुनाई गई है, वह सभी पूर्व से हत्या, प्राणघातक हमला, अमानत में खयानत जैसे गंभीर आपराधिक मामलों में सजायाफ्ता हैं। इन्होंने 26 मार्च 2005 को ग्राम दैलवारा निवासी बालमुकुंद को उसके घर से खींचकर बीच गांव में ले जाकर जघन्य हत्या कर दी थी।

सभी नौ अपराधियों को हत्या के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इनमें शिशुपाल सिंह, पुष्पेंद्र सिंह, धर्मेंद्र सिंह और दिग्विजय सिंह जेल में निरुद्घ चल रहे हैं, जबकि पांच अन्य जमानत पर रिहा चल रहे थे।
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