मनमाने तरीके से आइजीआरएस की शिकायतें हो रही निस्तारित
जांच रिपोर्ट आए बगैर ही निस्तारण में दर्शा दिया मामला
ललितपुर। जनता की शिकायतों का निस्तारण के लिए बनाई जनसुनवाई शिकायत निवारण प्रणाली (आइजीआरएस) अब कारगर साबित नहीं हो रही है। इसमें भी कार्रवाई से बचने के लिए रास्ते अफसरों ने खोज निकाले हैं। ऐसा ही एक मामला कृषि विभाग का प्रकाश में आया है। इसमें जांच आने का इंतजार किए बगैर ही उसे निस्तारण दर्शा दिया गया है। इससे शिकायतकर्ता खुद को छला सा महसूस कर रहा है।
योगी सरकार ने जनता को आसान न्याय दिलाने के मकसद से जनसुनवाई शिकायत निवारण प्रणाली बनाई है। जिसके पोर्टल पर कोई शिकायत दर्ज की जा सकती है। इसके निस्तारण पर मुख्यमंत्री कार्यालय की सीधी नजर रहती है। इसके बाद भी अफसर शिकायतों के निस्तारण में मनमानी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। पांच अप्रैल को ब्लाक महरौनी अंतर्गत ग्राम खिरिया लटकनजू निवासी रामभरोसे ने आईजीआरएस पर शिकायत दर्ज कराई। जिस पर डीएम मानवेंद्र सिंह ने संज्ञान लेते हुए नौ अप्रैल को मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एसके शाक्य को जांच अधिकारी बना दिया। नामित अफसर इसकी जांच शुरू कर दी। इसकी जांच उप कृषि निदेशक संतोष कुमार सविता तक पहुंचती, इससे पहले उन्होंने 16 मई को कृषि निदेशक के नाम लिखे पत्र में बताया कि मुख्य पशु चिकित्साधिकारी द्वारा जांच की जा रही है। जांच उपरांत वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया जाएगा। इसलिए इस शिकायत को निस्तारित मान लिया जाए। इस पत्र के अपलोड होने के कुछ घंटे बाद ही पोर्टल पर शिकायत निस्तारित दर्शाई जाने लगी। इससे शिकायतकर्ता को न्याय ही नहीं मिल सका। इसकी शिकायत की थी, उसमें नतीजा क्या निकला? यह शिकायतकर्ता के लिए रहस्य बन गया है। यह कोई पहला मामला नहीं है। बीते दिनों नगर पालिका में भी इसी तरह का एक प्रकरण सामने आया था। जिसमें मौके से अतिक्रमण हटाए बगैर ही शिकायत को निस्तारित मान लिया गया था। इसके उपरांत शिकायतकर्ता ने उस पर अपनी आपत्ति दर्ज की थी। ऐसे मामलों से जनसुनवाई पोर्टल का मखौल बनने लगा है। वहीं, लोगों का भी इससे भरोसा हटने लगा है।