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महिला के शव को नहीं मिला स्ट्रेचर, प्रशासन ने बैठाई जांच

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महिला के शव को नहीं मिला स्ट्रेचर
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तीन सदस्यीय कमेटी करेगी जांच, डाक्टर का स्थानांतरण
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। चिकित्सा महकमे में मानवता कोे शर्मसार करने वाली घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं हैं। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज झांसी में कटे पैर को तकिया बनाने का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि रविवार को ललितपुर जिला अस्पताल में भी एक महिला की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने उसके शव को उठाने के लिए न तो स्ट्रेचर दिया और न ही वाहन मुहैया कराया। ऐसी स्थिति में परिजनों को महिला का शव अपने हाथों में उठाकर घर ले जाना पड़ा। मामले की जानकारी होने पर जिलाधिकारी ने मामले की जांच के आदेश कर दिए हैं। डाक्टर का स्थानांतरण कर दिया गया है।
बीते रविवार की शाम खिरकापुरा निवासी अनीता की अचानक तबियत बिगड़ गई, उसे परिजन आनन-फानन में जिला चिकित्सालय में लाए, जहां इमरजेंसी में कार्यरत चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डाक्टरों ने महिला के शव को घर ले जाने की सलाह दी, इस पर परिजनों ने स्ट्रेचर की मांग की, लेकिन, अस्पताल प्रशासन ने इंकार कर दिया। परेशान हो चुके परिजन अपने हाथों में शव को उठाकर इमरजेंसी कक्ष से बाहर आ गए तो यहां शव को घर तक ले जाने के लिए वाहन नहीं मिला। इसके बाद परिजन निजी टैक्सी से शव को ले गए। पहले तो यह मामला दबा रहा लेकिन, जैसे ही इसकी जानकारी जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह को मिली तो उन्होंने तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच बैठा दी। इसमें सीएमओ डा. प्रताप सिंह, उप जिलाधिकारी व सीओ सिटी को शामिल किया गया। वहीं, घटना के दौरान इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक संतोष गुप्ता को जिला अस्पताल से तुरंत हटाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मड़ावरा भेज दिया गया।
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पूर्व में भी होती रहीं ऐसी घटनाएं
केस नंबर एक-
चार दिसंबर 2017 को कोतवाली क्षेत्र में रेलवे स्टेशन के पास 35 वर्षीय युवक का शव नाली में पड़ा मिला था। लोगों ने उसे जिला अस्पताल पहुंचाया था, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर शव को मोर्चरी में रखवा दिया था। आठ दिन बीतने के बाद भी इसका पोस्टमार्टम नहीं किया गया था। इसमें बैठाई गई जांच में दोषियों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।
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केस नंबर दो-
तीन जनवरी 2018 को तहसील तालबेहट अंतर्गत ग्राम सुनौरी निवासी हरीराम पुत्र श्रीराम अपनी पत्नी अमर कुंवर को प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तालबेहट लाया गया था, जहां तैनात कर्मचारियों की लापरवाही से अमर कुंवर की मौत हो गई थी। इसमें जांच के दौरान ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की लापरवाही से मौत होना पाया गया था। इसमें जिला स्वास्थ्य समिति में तैनात स्टाफ नर्स का स्थानांतरण कर मामले से पल्ला झाड़ लिया गया था।
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मंडलीय अधिकारी ने की जांच शुरू
घटना की हकीकत तक पहुंचने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अपने स्तर से जांच कर रहे हैं। इस मामले में अपर स्वास्थ्य निदेशक एसपी मिश्रा ने मंगलवार को जिला अस्पताल पहुंचकर चिकित्सक सहित कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। उधर, स्थानांतरित ईएमओ डा. संतोष कुमार गुप्ता का कहना है कि जो महिला आई थी उसका आकस्मिक उपचार किया गया है लेकिन कुछ ही देर में उसकी मृत्यु हो गई। इसी दौरान गोलीकांड के मरीज इलाज के लिए पहुंच गए। इस वजह से स्ट्रेचर व्यस्त हो गए। वह भी गोली कांड के मरीजों का उपचार करने लगे। ऐसे में यह स्थिति बनी।
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कराई जा रही जांच
इस मामले में एडी अपने स्तर से जांच कर रहे हैं। वहीं, जिलाधिकारी ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। जांच के उपरांत दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
डा. प्रताप सिंह
सीएमओ

बचाव में वीडियो वायरल
इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल किया गया है, जिसमें एक युवक जिसे इस महिला का परिजन बताया जा रहा है, वह डाक्टरों के बचाव में बयान दे रहा है कि इस मामले में अस्पताल प्रशासन की कोई गलती नहीं है।
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