नजूल की जमीन हथियाने की साजिश नाकाम
ललितपुर। तुवन चौराहे के पास स्टेशन रोड पर बेशकीमती जमीन हथियाने की साजिश कोर्ट के एक आदेश के बाद नाकाम हो गई है। कोर्ट ने उक्त जमीन के 1484 वर्गमीटर क्षेत्र पर ही खरीदारों का हक माना है, बाकी जमीन को सरकार की नजूल की संपत्ति घोषित किया गया है। इससे शहर में जमीनों का कारोबार करने वाले एक बड़े तबके के लोगों को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है।
शहर में सरकारी नजूल की जमीनों पर कब्जा कर हथियाने और उक्त जमीनों पर भूमाफियाओं द्वारा बाजार से भी अधिक रेट पर बेचने का खेल जोरों पर चल रहा है। लेकिन एक वर्ष में शहर में राजस्व और दीवानी न्यायालयों द्वारा भूमाफियाओं द्वारा उक्त नजूल की जमीनों पर अवैध कब्जेदारों की साजिशों को लगातार नाकाम कर दिया गया है। गत वर्ष रानीबाग की आठ एकड़ बेशकीमती जमीन के मामले में भी जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने नजूल की भूमि घोषित कर दिया था और उक्त मामले में एक दर्जन से अधिक लोगों को उक्त जमीन पर कब्जा करने के मामले में भूमाफिया घोषित किया था। हालांकि यह मामला उच्च न्यायालय व कमिश्नर न्यायालय में विचाराधीन है।
वर्तमान में तुवन चौराहा के पास स्टेशन रोड पर बेशकीमती नजूल की जमीन का विवाद शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। सहायक शासकीय अधिवक्ता इंद्रपाल सिंह यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि तुवन चौराहा के पास स्थित आराजी संख्या (पुराना)-1930 व आराजी संख्या(नया) 1893 जिसका कुल क्षेत्रफल 2916.80 वर्गमीटर था, इसका पट्टा 05 दिसंबर 1912 में पहले बाजिदा बेगम पत्नी एम. माशूक अली को हुआ था। उक्त आराजी बाजिदा बेगम के पाकिस्तान चले जाने के बाद यह (शत्रु संपत्ति) घोषित की गई थी। उक्त आराजी में बाजिदा बेगम ने मकान नंबर ए-6/2 और एक बंगला नंबर-2 निर्मित किए थे। उक्त निष्क्रांत संपत्ति आगरा बोर्ड द्वारा 10 फरवरी 1961 को नीलामी द्वारा वाईआर पुरी ने क्रय की थी और 26 नवंबर 1962 को विक्रय प्रमाणपत्र निष्पादित होकर पंजीकृत किया था। लेकिन, यहां उक्त संपत्ति का एरिया नहीं खोला गया, सिर्फ इस संपत्ति की चौहद्दी ही दिखाई गई और विक्रय पत्र में सीमाओं से बद्घ उक्त संपत्ति का क्षेत्रफल 2916.80 वर्गमीटर था। 21 जनवरी 1963 को उक्त संपत्ति वाईआर पुरी से सिविल लाइन निवासी डॉ. अनुराग चौधरी, अनुपम चौधरी पुत्र स्व. डॉ. ताराचंद चौधरी, अलंकार चौधरी, अलका चौधरी व अरहंत कालोनी कोल्हापुर महाराष्ट्र निवासी अमुला चौधरी आदि ने खरीदी थी।
वाईआर पुरी द्वारा जो संपत्ति क्रय की गई थी, उसका कुल क्षेत्रफल 2916.80 वर्गमीटर था, जिसमें बंगला एवं खुली जमीन शामिल थी। इस कारण उक्त लोग 291680 वर्गमीटर के स्वामी और काबिजदार हो गए थे। शासन द्वारा उस समय एक फ्रीहोल्ड नीति आई, जिसमें 1775 गज भूमि यानि 2916.80 वर्गमीटर को आवेदन किया गया था। जबकि रजिस्ट्री 1486 वर्गमीटर की ही की गई थी और 1432.14 वर्गमीटर जमीन पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाया गया। उक्त मामले में वर्ष 2009 में सिविल जज सीनियर डिवीजन की न्यायालय द्वारा 15 अप्रैल 2009 को एक आदेश पारित कर उक्त 2916.80 वर्गमीटर की पूरी जमीन को खरीदारों के पक्ष में फैसल दिया। इस पर उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा सचिव, आवास अनुभाग लखनऊ, जिला मजिस्ट्रेट और अपर जिला मजिस्ट्रेट/नजूल विभाग द्वारा अवर न्यायालय के आदेश के विरुद्घ अपर न्यायालय में अपील दायर की थी। बुधवार को अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट हरकेश कुमार की अदालत ने उक्त बेशकीमती जमीन के मामले में अवर न्यायालय के आदेश को निरस्त करते हुए खरीदारों की मात्र 1484 वर्गमीटर जमीन ही माना बाकी शेष जमीन को नजूल की भूमि घोषित करते हुए सरकार के पक्ष में निर्णय सुनाया है।