अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम/विशेष न्यायाधीश गिरोह बंद अधिनियम) मनोज कुमार शुक्ला की अदालत ने गैंगेस्टर के अपराध में दोषी पाए जाने पर पांच अभियुक्तों को सात-सात वर्ष का कठोर कारावास और प्रत्येक को दस-दस हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
सहायक शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव ने बताया कि 11 वर्ष पूर्व पांच अक्टूबर 2007 को प्रभारी निरीक्षक मो. नसीम खान ने थाना कोतवाली में दी तहरीर में बताया था कि वह हमराहियों के साथ थाना क्षेत्र में गश्त पर थे। जैसे ही वह मुहल्ला रामनगर होते हुए मुहल्ला वंशीपुरा पहुंचे, तो वहां के लोगों ने बताया कि मुहल्ले के प्रदीप, संदीप, नरेंद्र, चंदन, कन्हैया व आशाराम सभी आपराधिक प्रवृत्ति के लोग हैं और यह अपना अलग-अलग गिरोग बनाए हुए हैं। यह अपने आर्थिक व भौतिक लाभ के लिए आम जनता से डरा धमकाकर धनोपार्जन करते हैं। इनके भय व आतंक की वजह से कोई इनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं कराता है और न ही कोई गवाही देने का साहस ही कर पाता है। इन सभी के द्वारा किए गए कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनकी गैंग पर अंकुुश लगाने के लिए आपराधिक चार्ट जिलाधिकारी के अनुमोदन से प्राप्त किया जा चुुका था। प्रभारी निरीक्षक की तहरीर के आधार पर उक्त सभी के खिलाफ गैंगेस्टर एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली गई थी। इस मामले में शामिल एक अभियुक्त नरेंद्र की हत्या कर दी गई थी।
जिसके बाद न्यायालय में उक्त् मामले में प्रदीप ग्वाला, संदीप ग्वाला, चंदन, कन्हैया व आशाराम के खिलाफ आरोप पत्र प्रस्तुत किए गए थे। यह भी बताया गया कि उक्त अपराधियों द्वारा एक 12 अगस्त मुहल्ला रामनगर निवासी संजीव कुमार पुत्र धीरज की पैसों के लेन देन में हत्या कर उसका शव कुएं में फेंक दिया था। उस समय यह मामला शहर की सुर्खियां बना था। उक्त अपराधियों पर गैंगेस्टर के मामले में शुक्रवार को अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर निर्णय सुनाते हुए पांच अभियुक्तों को दोषी पाते हुए सात-सात वर्ष के कठोर कारावास और दस-दस हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है।