मंच एक और समारोह दो
ललितपुर।
गिन्नौट बाग में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के बैनरतले 11 जोड़ों की कराई गई शादी का आयोजन विवादों में घिर गया है। इसकी वजह एक मंच पर दो कार्यक्रमों का होना है। जहां सरकारी योजना में 11 नवयुगलों ने दांपत्य जीवन स्वीकार किया, वहीं संस्था द्वारा कराए गए आयोजन में 101 जोड़ों की शादी का दावा किया है। इस दौरान कई वर वधुओं के परिजनों ने पंजीयन के नाम पर उगाही के आरोप लगाए हैं।
गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों की बेटियों की शादी में 20 हजार रुपये के अनुदान देने की व्यवस्था थी। इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गड़बड़झाला पाए जाने पर बंद करते हुए उसकी जगह नई योजना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना लेकर आए। इसमें बेटी की शादी में 35 हजार रुपये खर्च करने का प्रावधान रखा गया। इसमें बीस हजार रुपये बेटी के बैंक खाते में भेजे जाते हैं तो वहीं दस हजार रुपये से घर का जरूरती सामान दिया जाता है। अवशेष पांच हजार रुपये से पंडाल व खाने का खर्च उठाया जाता है। इस आयोजन के लिए जिम्मेदार अफसर लंबे समय से हाथ पैर मार रहे थे। लेकिन, उन्हें पात्र वर वधु नहीं मिल रहे थे। इसी दौरान एक संस्था ने 101 जोड़े तलाश कर लिए। इसका फायदा उठाने के लिए कुछ लोग सक्रिय हो गए, जिम्मेदार अफसरों ने इन्हीं में से कुछ जोड़ों की शादी मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना कराने की रूपरेखा तैयार कर ली। शादी स्थल पर ही आनन फानन में सूची को अंतिम देते हुए जोड़ों को शादी के लिए बुला लिया। सबसे पहले 17 जोड़ों को शादी के लिए आमंत्रित किया गया, लेकिन इनमें से दो जोड़ों ने किसी कारण से अपनी शादी टाल दी। जिस समय रस्में कराई जा रही थी, उस दौरान चार जोड़े रास्ते में ही रह गए। इस तरह आयोजन स्थल पर केवल 11 जोड़ों की शादी कराई जा सकी। इनमें से एक शहर का जोड़ा भी शामिल रहा। जब वर माला की रस्में पूरी हो गई तो डीएम मानवेंद्र सिंह ने 11 वधुओं को बीस हजार रुपये की धनराशि का स्वीकृति प्रमाण पत्र सौंपा। इस दौरान डीएम ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना को अच्छी योजनाओं में से एक बताया। उन्होंने नाती राजा और उनके सहयोगियों की भी प्रशंसा की। लेकिन, जैसे ही डीएम मंच से उतरे वैसे ही मंच से सामूहिक विवाह योजना का बैनर हटा दिया गया और शेष वर वधुओं के विवाह का सिलसिला चलता रहा। इसमें किसी बैनर का इस्तेमाल नहीं हुआ। सबसे बड़ी बात यह रही कि ग्राम हसारकलां निवासी धनीराम खुद को ठगा सा महसूस करते नजर आए। उनका कहना था कि उन्होंने पुत्री सपना, रचना की शादी के पंजीयन के लिए कुल साठ हजार रुपये दिए थे। उसे न तो संस्था ने सामान दिया और न ही भोजन की व्यवस्था कराई और तो और शासन की योजना से भी वंचित रह गए, जबकि उसके पास एक एकड़ जमीन ही है।
ग्राम सतवांसा निवासी विकास, मंगल नोटों की माला पहनकर शादी समारोह में पहुंचे। उनकी नोटों की माला में दस-दस रुपये के नोट लगे हुए थे, जिन्हें हर कोई देखने के लिए आतुर नजर आया।
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ग्राम रनगांव निवासी यशवंत ने बताया कि एक संस्था ने पंजीयन कराने के लिए नाम पर दोनों पक्षों से 15-15 हजार रुपये लिए। इसके एवज में कुछ सामान, सोफासेट, अलमारी व बक्सा दिया है। वहीं, विवाह योजना में बीस हजार रुपये का स्वीकृति पत्र पुष्पा को प्रदान किया गया।
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आयोजन की कराएंगे जांच
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के आयोजन में न तो उन्हें आमंत्रण दिया गया है और न ही इसकी जानकारी दी गई। इस आयोजन की जांच कराई जाएगी, जो भी दोषी पाया जाएगा, उनसे रिकवरी भी कराई जाएगी।
रामरतन कुशवाहा
सदर विधायक
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कांग्रेस ने उठाई जांच की मांग
नगर कांग्रेस कमेटी ने बैठक कर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत कराए गए आयोजन में भारी गड़बड़ी बरती गई। इसमें नियम कायदों का भी ध्यान नहीं रखा गया और न ही इसका व्यापक प्रचार- प्रसार कराया गया। नगर अध्यक्ष हरीबाबू शर्मा ने सीएम से इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। बैठक में शिवनारायण संज्ञा, सुदीप रिछारिया उपस्थित रहे।
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झलकियां
मंच पर नजर नहीं आए मुख्य अतिथि
समारोह में मुख्य अतिथि प्रदेश के श्रम सेवा राज्यमंत्री मनोहरलाल पंथ व विशिष्ट अतिथि सदर विधायक रामरतन कुशवाहा को बनाया गया था, लेकिन आयोजन में दोनों ही अतिथियों की गैर मौजूदगी रही। वहीं, पूर्व विधायक रमेश कुशवाहा व सपा नेता रमेश खटीक ने मंच साझा किया। वहीं, नाती राजा को भी कांग्रेस से जुड़ा हुआ बताया जाता है।