शाखा प्रबंधक समेत तीन पर रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
शहर कोतवाली क्षेत्र स्थित गल्ला मंडी की एसबीआई शाखा में किसानों की फसल बीमा की धनराशि का गबन करने के मामले में मुख्य प्रबंधक की तहरीर पर पुलिस ने तत्कालीन शाखा प्रबंधक समेत दो फील्ड कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
गौरतलब हो कि पिछले कई सालों से जिले के किसान प्राकृतिक आपदा का शिकार हो रहे हैं। इसके लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से लगातार मुआवजा दिया जाता रहा। इसके अलावा किसानों के लिए केंद्र सरकार की योजना फसल बीमा योजना के तहत राशि भी आई, लेकिन यह राशि किसानों के खाते में नहीं पहुंचाई गई। इस मुद्दे को लेकर किसानों ने आंदोलन किए, लेकिन कोई फायदा नहीं मिला। हाल ही में यह मामला अखबारों में प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने भी इसकी पड़ताल शुरू की। बैंक द्वारा की जा रही जांच में क्षेत्रीय प्रबंधक इस मामले की जांच कर रहे थे। वहीं, शुक्रवार को जिले के दौरे पर पहुंचे गृह सचिव ओपी वर्मा से जब किसानों ने शिकायत की तो उन्होंने इस मामले को संज्ञान में लेकर इसकी जांच करवाने की बात कही है।
यह दी तहरीर
मंडी शाखा के मुख्य प्रबंधक सीतापुर जिले के आनंदनगर निवासी शिवेंद्र मिश्रा पुत्र काली प्रकाश मिश्रा ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत किसान क्रेडिट कार्ड खाता धारकों की फसल का बीमा कराया गया था और फसल के नुकसान होने के कारण बीमा कंपनी द्वारा पात्रता के अनुसार धनराशि उन किसानों के खातों में सीधे डाले जाने के लिए भारतीय स्टेट बैंक की कृषि उत्पादन मंडी समिति की शाखा को आवंटित किया गया था। इसके लिए तत्कालीन शाखा के प्रबंधक जिला पंचायत के पीछे सिविल लाइन निवासी महिपाल जैन पुत्र भगवानदास जो पांच दिसंबर 2014 से 31 अगस्त 2017 तक अपने पद पर रहे। इसके साथ ही बैंक में कार्यरत कृषि क्षेत्राधिकारी औरेया जिले के डिबियापुरा के जमुहा गांव निवासी सुरेंद्रचंद्र पुत्र प्यारेलाल और आजादपुरा निवासी रंजीत सिंह पुत्र रामप्रकाश भी इसी दौरान शाखा में कार्यरत रहे। तीनों अधिकारियों ने बीमा कंपनी द्वारा किसानों के खाते में जमा करने के लिए भेजी धनराशि को फर्जी तरीके से अपात्र किसानों के क्रेडिट कार्ड खाता धारकों के खाते में जमा करवा दी। इसके बाद इन किसानों को यह जानकारी दी कि आपने खाते में गलती से यह धनराशि जमा हो गई है और उनके द्वारा क्रेडिट कार्ड के नवीनीकरण के लिए यह धनराशि स्वयं की ओर से जमा की गई है। इसके बाद किसानों से तत्काल उस राशि को निकासी फार्म के माध्यम से निकलवा ली और अमानत में खयानत की। मामला पकड़ में आने के बाद नए प्रबंधक ने इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दी और इसकी अभी तक की जांच में यह मामला एक करोड़ 12 लाख 51 हजार दो सौ 99 रुपये के गबन का पाया गया। प्रबंधक की तहरीर के आधार पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
इन किसानों के खाते में राशि जमा कर किया गबन
मुख्य प्रबंधक शिवेंद्र मिश्रा ने बताया कि गबन की गई राशि को अपात्र किसान क्रेडिट कार्ड धारकों के खाते में गलत तरीके से जमा किया गया और उन्हें गलती की बात स्वीकारते हुए उनके खाते से रुपये निकलवा लिए गए। इनमें महेशपुरा निवासी श्रीमान सिंह, ककरुआ निवासी पर्वत सिंह, मड़वारी गांव निवासी गनेश प्रसाद, भैंसाई गांव निवासी करन, बूचा गांव निवासी रामदीन, ककरुआ निवासी रामेश्वर, ककरुआ निवासी रामकुमारी पत्नी हरनाम सिंह, बीघाखेत निवासी महताब सिंह, बख्तर निवासी फूल सिंह, हंसारा गांव निवासी रामलखन, बूचा निवासी दमरू, बूचा के ही मनीराम, ककरुआ निवासी श्यामलाल पुत्र जूजे ने जांच के दौरान लिखित रूप से बताया कि उनके खाते में जमा की गई राशि तत्कालीन प्रबंधक द्वारा निकलवा ली गई है।
ऐसे पकड़ में आया मामला
मुख्य प्रबंधक शिवेंद्र मिश्रा की तहरीर के अनुसार यह पूरा घोटाला 2014 से लेकर 2017 के बीच का है। एक सितंबर 2017 को तत्कालीन बैंक मैनेजर के रिटायर होने के बाद मेन ब्रांच में तैनात गिरीश कुमार खरे ने शाखा प्रबंधक के तौर पर कार्यभार संभाला और यह मामला मिलने पर तत्काल उन्होंने अपने उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया। उच्चाधिकारियों ने इस मामले की पड़ताल की तो मामला सही पाए जाने पर जांच शुरू कर दी।
दो लोग बाहर के भी शामिल
करोड़ों रुपये के घोटाले में सिर्फ बैंक कर्मचारी ही नहीं बल्कि बाहर के भी कुछ लोग शामिल हो सकते हैं। गौरतलब है कि अधिक संख्या में डाटा होने की स्थिति में बैंक बाहर से कुछ लोगों को बुलाकर उनके माध्यम से डाटा फीडिंग का कार्य करवाती है। बैंकिंग कर्मचारियों की मानें तो इस मामले में भी दो बाहरी लोगों की संलिप्तता है। इनके द्वारा ही पूरे डाटा को फीड किया गया और घालमेल किया गया। इसमें एक व्यक्ति जेनरेटर का कार्य करता है और दूसरा कंप्यूटर ऑपरेटर है।