चार महीने से फाइलों में दबा हुआ मनरेगा का फर्जीवाड़ा
उप प्रभागीय वनाधिकारी ने की थी गहन छानबीन
आरोपों के घेरे में हैं ललितपुर रेंजर
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। वन विभाग में मनरेगा के फर्जीबाडे़ की जांच पिछले चार महीनों से फाइलों में दबी हुई है। इसकी गहन छानबीन उप प्रभागीय वनाधिकारी ने की थी। उनका तबादला होते ही पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। इससे जांच किसी नतीजे पर अभी तक नहीं पहुंच सकी है।
वन विभाग के कामकाज किसी से छिपे नहीं है। यह सबसे ज्यादा खेल पौधरोपण के नाम पर होता है। ऐसा ही एक मामला तत्कालीन उप प्रभागीय वनाधिकारी आरके त्रिपाठी ने पकड़ा था। बीते माहों में वर्ष 2018 पौधरोपण के अग्रिम मृदा कार्य शुरू किए गए थे। इसमें गड़बड़ी की भनक लगते ही उप प्रभागीय वनाधिकारी ने हरकत में आकर मौके पर निरीक्षण किया था। 16 अप्रैल को उन्होंने महरौनी खुर्द में देखा कि 4 हजार के मुकाबले 1500 बोनानाली खोदी गई, जबकि विभागीय रिकार्ड अनुसार 2154 बोना नाली खुदान की बिलिंग और मापन किया गया। गड्ढा खुदान आदि अन्य कोई कार्य नहीं हुआ। बोना नाली में अधिकांश क्षेत्र में मौजूद पुराने पौधरोपण की असफल बोनानालियों को खोदकर बनाई गई हैं, जो मानक के विपरीत है। इसी क्षेत्र में हरित पट्टिका योजना अंतर्गत 4375 पौधे रोपित किए गए थे, अंदर की ओर पौधरोपण की स्थिति संतोषजनक नहीं है। पंचवटी के बीच के स्थानों पर मनमाने ढंग से पौधरोपण किया गया है जिसे हटाने की जरूरत है। दीनदयाल उप वन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। 25 अप्रैल को दूधई पाली एवं दूधई बम्हौरी वन क्षेत्र में पेडों का कटान हुआ है। दूधई पुराने विश्राम गृह के आगे दायी ओर लगभग दो किलोमीटर दूरी पर कपूरी बाबडी है, इसके पास करीब दस हैक्टेयर क्षेत्र में बेल, आंवला, चिरौजी के लगभग एक सौ बीस पेड़ों के ठूंठ, तीन चार स्थानों पर बीस क्विंटल लकड़ी रखी मिली। कटे पेडों के ठूठ भूमि तल से छह से लेकर तीन फीट ऊंचाई तक के हैं। कोई एच दो केस इजरा नहीं किया गया है। अवैध कटी पडी लकडी को सी एक स्टाक में लिया जाए। दूधई भाग एक दस हेक्टेयर क्षेत्र में अग्रिम मृदा कार्य मनरेगा के तहत कराया गया। इसमें पांच हजार गड्ढा खुदान एवं दो हजार बोना नाली खुदान का लक्ष्य है। जिसके सापेक्ष पचास बोनानाली का खुदान हुआ जबकि पिछले वित्तीय वर्ष तक 1129 बोनानाली खुदान की बिलिंग एवं मापन किया गया। मौके पर कराए गए कार्य से अधिक की बिलिंग एंव मापन गंभीर अनियमितता है। इस संबंध में एसडीओ ने 26 अप्रैल को क्षेत्रीय वन अधिकारी गणेश प्रसाद शुक्ला से स्पष्टीकरण तलब किया। इसमें कहा गया कि लगभग 1100 बोनानालियों का खुदान का बिल बिना श्रमिकों से कार्य कराए ही मनरेगा के तहत बनाया गया है। बिना कार्य हुए एमबी कर देना दंडनीय अपराध है। एसडीओ के गैर जनपद स्थानांतरित होते ही पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
तीन सदस्यीय समिति भी रही उदासीन
दूधई पाली और दूधई बम्होरी वन क्षेत्र में उड़ाका दल ने पकडे़ अवैध कटान के मामले में तत्कालीन डीएफओ गोविंदशरण ने तीन सदस्यीय समिति कांबिंग के लिए बनाई थी। इस समिति ने भी मौके पर जाना उचित नहीं समझा, जिससे इसकी रिपोर्ट आज तक आला अफसरों के समक्ष प्रस्तुत हो सकी।
जताई अनभिज्ञता
मेरे कार्यकाल में इस तरह का कोई मामला संज्ञान में नहीं है। पूर्व के अधिकारियों ने इस संबंध में जानकारी नहीं दी। किसी कर्मचारी ने भी उनके समक्ष ऐसी कोई फाइल पेश की। प्रकरण सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी।
ईश्वर दयाल, डीएफओ