जाली नोट रखने के मामले में पांच वर्ष की सजा
ललितपुर। जाली नोट रखने का अपराध सिद्ध होने पर अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम) मनोज कुमार शुक्ला की अदालत ने ग्राम खड़ेरा निवासी एक युवक को पांच वर्ष के सश्रम कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में दस माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
सहायक शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव ने बताया कि थाना कोतवाली एसएसआई के के वाजपेयी पुलिस बल के साथ आठ जनवरी 2010 को शाम करीब साढ़े सात बजे तुवन मंदिर तिराहे पर मौजूद थे, तभी मुखबिर द्वारा सूूचना दी गई कि एक व्यक्ति वर्णी चौराहे के पास स्थित सेंट्रल बैंक के सामने खड़ा है। उसके पास जाली नोट हैं। कई दुकानदारों को वह नकली नोट देकर चलाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन कई लोग उस नकली नोट लेने में हिचक रहे हैं। मुखबिर की सूचना पर एसएसआई टीम के साथ मौके पर सेंट्रल बैंक के सामने पहुंचे और मुखबिर के इशारा करने पर पहले तो वहां पहुंचे एसओजी टीम के सिपाहियों के सामने खुद की तलाशी ली, तो उनमें से किसी के पास भी नकली नोट करेंसी नहीं मिली। इसके बाद मुखबिर द्वारा बताए गए उक्त व्यक्ति को घेरकर बल प्रयोग कर पकड़ लिया। पकड़े गए व्यक्ति का नाम पता लेते हुए तलाशी ली गई तो उसने अपना नाम ग्राम खड़ेरा निवासी महेंद्र पुरोहित पुत्र पन्नालाल पुरोहित बताया। तलाशी लेने पर उक्त व्यक्ति के पैंट की जेब से एक खाकी रंग के लिफाफे में रखे 500-500 रुपये के कुल बीस हजार रुपये और सौ-सौ रुपये के पांच सौ रुपये बरामद हुआ थे। कुल 20 हजार पांच सौ रुपये बरामद नोटों को जांचा, परखा और सहयोगियों को दिखाया गया। बरामद नोटों में धातु की रेखा और नंबरों की लिखावट अनियमिततापूर्ण थी और असली नोटों से पूरी तरह अलग पाए गए। बरामद नोटों को मय लिफाफा के कब्जा में लिया गया और अभियुक्त के खिलाफ धारा 489 ख व 489 ग के तहत मुकदमा पंजीकृत कर न्यायालय में आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किए गए, तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। न्यायालय में उक्त मुकदमे के विचारण के दौरान देवास के प्रिंटिंग प्रेस की रिपोर्ट दाखिल की गई। रिपोर्ट में बरामद नोटों को काउंटर फीट नोट बताया गया। बुधवार को अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश ने उक्त जाली नोट रखने के मामले में अभियुक्त महेंद्र पुरोहित को दोषी पाते हुए धारा 489 ग यानी जाली नोटों की बरामदगी के मामले में पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यही नहीं दस हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर अभियुक्त को दस माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।