गोरखपुर। शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त लिपिक की ट्रेन से कटकर जान चली गई। बुधवार को सूरजकुंड क्रॉसिंग के पास ट्रैक से शव बरामद हुआ तो जेब से मिली चिट्ठी में शहर के मशहूर हड्डी रोग विशेषज्ञ पर आत्महत्या के लिए मजबूर करने की चौंकाने वाली कहानी सामने आई। इस पत्र को सुसाइड नोड मानते हुए तथा इसी आशय की घर वालों से मिली तहरीर को आधार बनाते हुए जीआरपी ने चिकित्सक के खिलाफ खुदकुशी के लिए प्रेरित करने का केस दर्ज कर लिया है।
रेलवे ट्रैक पर जान गंवाने वाले शख्स गोरखनाथ थाना क्षेत्र के बिलंदपुर खत्ता निवासी ठाकुर दयाल जायसवाल थे। शहर के लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज में लिपिक के पद से रिटायर्ड ठाकुर दयाल के जेब में मिले पत्र के मुताबिक रीढ़ की हड्डी से संबंधित बीमारी को लेकर वह साल 2016 से मेरी गोल्ड हॉस्पिटल में डॉ. संजय जायसवाल से इलाज करा रहे थे। इलाज में चार-पांच लाख रुपये खर्च हुए लेकिन तबीयत नहीं सुधरी। इससे निराश होकर वह ट्रेन से कटकर खुदकुशी कर रहे हैं।
जीआरपी इंस्पेक्टर आनंद सिंह ने बताया कि मृतक के घर वालों की ओर से मिली तहरीर में वही आरोप दोहराया गया है, जो मृतक की जेब से मिली चिट्ठी में है। इस आधार पर डॉ. संजय जायसवाल के खिलाफ खुदकुशी के लिए प्रेरित करने का केस दर्ज कर लिया है। मामले की जांच की जा रही है।
इस मामले को लेकर जब डॉ. संजय जायसवाल का पक्ष जानने के लिए फोन किया गया तो कॉल अटैंड करने वाले कर्मचारी ने उनसे बात करने में असमर्थता जता दी। कहा, डॉक्टर साहब के शहर से बाहर होने के कारण बात नहीं हो सकती।
बेटे ने झुठलाया पिता के पत्र का आरोप
शिक्षा विभाग के रिटायर्ड कर्मचारी ठाकुर दयाल जायसवाल के बेटे आशीष जायसवाल ने एक ओर जहां जीआरपी थाने में तहरीर देकर पिता की जेब से मिले पत्र का हवाला देते हुए डॉ. संजय जायसवाल के खिलाफ केस दर्ज कराया, उसी बेटे ने तहरीर देने के कुछ समय बाद मीडिया से बातचीत में पिता की चिट्ठी के आरोप को झुठला दिया। कहा कि वह डॉक्टर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं चाहते। मीडिया ने खुद तहरीर देकर विरोधाभासी बात करने का सवाल उठाया तो आशीष ने जीआरपी पर दबाव बनाकर तहरीर लेने का आरोप लगा दिया। जीआरपी इंस्पेक्टर का कहना है कि बेटे की तहरीर पर ही केस दर्ज किया है, अगर वो डॉक्टर पर कार्रवाई न करने की इच्छा जताते हुए आधिकारिक बयान देंगे तो उसे विवेचना का हिस्सा बनाकर अगली कार्रवाई उसीके मुताबिक की जाएगी।