भाई ने उठाए प्रशासन की थ्योरी पर सवाल
दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री के बयान को बताया गलत
एसडीएम आत्महत्या
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। सरकारी आवास पर गोली लगने से हुई एसडीएम की मौत के मामले में राजनीति गर्माने लगी है। विपक्षीदल जहां सरकार और प्रशासन को घेरने में जुटे हुए हैं, वहीं मृतक एसडीएम के भाई ने प्रशासन की थ्योरी पर सवालिया निशान खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से बताई गई बातें गले नहीं उतर रही हैं। दो घंटे से आत्महत्या की प्लानिंग कर रहा अधिकारी विभागीय कार्य किसके लिए कर रहा था। घटना पूरी तरह से संदिग्ध है और आत्महत्या की सोचने वाला अधिकारी सरकारी काम क्यों कर रहा था। इसके अलावा बिना किसी जांच के ही मामले को आनन-फानन में आत्महत्या घोषित कर दिया।
रविवार 30 सितंबर को मड़ावरा में तैनात एसडीएम हेमेंद्र कांडपाल की सरकारी आवास पर गोली लगने से मौत हो गई थी। इससे पूर्व वह केंद्रीय मंत्री उमा भारती के कार्यक्रम में शामिल हुए और गंगचारी व सौंरई समेत तीन गांवों में अतिवृष्टि से हुए फसल नुकसान का जायजा लेने पहुंचे। वहां से लौटकर एसडीएम कार्यालय से वापस अपने सरकारी आवास पहुंचे। इसी दौरान अचानक खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि उन्होंने होमगार्ड की सर्विस राइफल लेकर खुद को गोली मार ली। इससे उनकी मौत हो गई। वहीं, प्रशासन ने बताया कि वह अपने बच्चे की बीमारी से परेशान थे, इस कारण उन्होंने आत्महत्या कर ली। प्रशासन की इस पूरी थ्योरी पर आश्चर्य जाहिर करते हुए मृतक एसडीएम के भाई देवेंद्र ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली लगने से मौत की पुष्टि हुई है और उनके पेट से बिना पचा दलिया मिला है। यह दलिया उन्होंने अपने आवास पहुंचकर खाया था और रोटी का एक निवाला भी तोड़ा था। वहीं घटनास्थल का कमरा भी खुला हुआ था।
प्रशासन ने बिना किसी जांच के आनन-फानन में इसे आत्महत्या घोषित कर दिया। जबकि परिस्थितियां पूरी तरह संदिग्ध थीं। इसके लिए न तो बैलिस्टिक जांच की जरूरत समझी गई और न ही सीन रिक्रियेशन करवाया गया। इसके साथ ही, राइफल और शव का एंगिल भी संदेहास्पद प्रतीत हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने सवालिया निशान खड़े करते हुए बताया कि एसडीएम यदि दो घंटे से आत्महत्या की प्लानिंग कर रहे थे, तो वह विभागीय कार्य क्यों कर रहे थे। इसके अलावा सरकारी आवास पर दलिया क्यों खाया। वहीं उन्होंने पारिवारिक समस्या से पूरी तरह इंकार कर दिया। उन्होंने बताया कि हेमेंद्र बहादुर अफसर थे और उनका पुत्र पिछले 15 साल से बीमार है। इस दौरान उनकी कई स्थानों पर पोस्टिंग हुई और कोई परेशानी नहीं हुई। तो ललितपुर में क्या वजह रही कि उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। उन्होंने पूरे मामले को संदिग्ध बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की और सीन रिक्रियेशन करवाए जाने की मांग की। गौरतलब है कि घटना के दिन ही एक फोन कॉल आने की बात कही जा रही थी। जिसे बाद में अधिकारियों ने सिरे से खारिज कर दिया और बताया कि एसडीएम के पास आखिरी कॉल घटना से 40 मिनट पहले एक लेखपाल की आई थी। देवेंद्र ने पुलिस से एसडीएम के तीनों नंबरों की सीडीआर रिपोर्ट भी सौंपने की मांग की है। वहीं झांसी में बुधवार को दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री और कर्मकार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष रघुराज सिंह के बयान पर भी नाराजगी जाहिर की। गौरतलब हो कि रघुराज सिंह ने झांसी में विवादित बयान देते हुए कहा था कि सरकार ने भ्रष्टाचार खत्म कर दिया है। इस कारण दो नंबर के तरीकों से रुपये कमाने वाले अधिकारी आत्महत्या कर रहे हैं। जल्दी अमीर बनने की चाहत रखने वाले अधिकारियों की कमाई के रास्ते बंद हो गए हैं, इस कारण वह इस तरह के कदम उठा रहे हैं। इस बयान पर एसडीएम के भाई ने बताया कि हेमेंद्र सच्चे और सरल अधिकारी थे। उनपर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं था।