सिविल लाइंस निवासी अखिलेश चौधरी पुत्र स्वर्गीय अरविंद कुमार चौधरी ने सीजेएम न्यायालय में धारा 156 (3) के अंतर्गत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करते हुए बताया कि उसके पिता के नाम नगर पालिका नजूल आराजी संख्या 1893 पर मकान बना हुआ है, जिस पर उनका कब्जा भी है। उक्त आराजी में शामिल अलका चौधरी एवं अलंकार चौधरी ने फर्जी तरीके से जालसाजी कर उसके पिता के नाम आराजी का इकरार नामा निखिल तिवारी पुत्र रामकुमार तिवारी निवासी सिविल लाइंस, राजेश कुमार जैन निवासी तालाबपुुरा, नरेंद्र कड़ंकी निवासी नझाई बाजार, प्रदीप गुप्ता निवासी सिविल लाइंस, शरद खैरा निवासी गांधीनगर, पूर्व विधायक रामकुमार तिवारी निवासी सिविल लाइन, सुरेंद्र कड़ंकी निवासी नझाई बाजार, विजय बहादुर सिंह निवासी ग्राम गिदवाहा थाना महरौनी व नेमिचंद जैन निवासी तालाबपुरा से मिलीभगत करके कर दिया, जबकि इकरारनामा कराने वालों को यह जानकारी थी कि उक्त नजूल की भूमि का कोई फ्री होल्ड नहीं हुआ है। इस कारण उक्त भूखंड का इकरारनामा करने का कोई औचित्य भी नहीं है। इसके बाद सभी लोग उसे कब्जा से बेदखल करने का प्रयास करने लगे। अधिकारियों से इसकी शिकायत करने पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
वादी के अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह का कहना है कि बृहस्पतिवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ज्योत्सना सिंह ने अखिलेश चौधरी के प्रार्थना पत्र को गंभीरता से लेते हुए कोतवाली प्रभारी निरीक्षक को एफआइआर दर्ज करके दस दिन में आख्या प्रस्तुत करने के आदेश जारी कर दिए हैं।