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कोरोना संक्रमण जांच का दायरा बढ़कर पहुंचा दस गुना

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कलेक्ट्रेट सभागार में चिकित्सकों के साथ बैठक करते जिलाधिकारी योगेश कुमार शुक्ल - फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। जैसे- जैसे कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है, वैसे- वैसे जांचों की संख्या की रफ्तार बढ़ रही है। जून में 50 से 60 सैंपल जांच को भेजे जा रहे थे, जो अब बढ़कर 300 तक पहुंच गई है। ऐसे में शुरुआत में सैंपलों की जांच रिपोर्ट दो दिन में मिल रही थी, वह अब सात दिन से अधिक समय में मिल रही है। ऐसे में सैंपल देने वाले क्वारंटीन न रहकर बाहर घूमते रहते हैं। इससे संक्रमण बढ़ने का खतरा बढ़ गया है।
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कोरोना संक्रमण ने अपनी रफ़्तार तेज कर दी है। जहां पहले माह में एक या दो संक्रमित मरीज मिल रहे थे, वहीं अब बढ़कर दो दर्जन तक पहुंच गए हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या को लेकर लोग चिंतित बने हुए हैं। अधिकांश लोग कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर लापरवाही कर रहे हैं। इसका उदाहरण बाजार खुलने पर देखा जा सकता है। यहां पर लोग बेखौफ होकर बिना मास्क के घूमते रहते हैं। अधिक भीड़ होने के कारण सामाजिक दूरी का पालन नहीं किया जा रहा है।
मई में केवल दो कोरोना संक्रमित व्यक्ति ही पाए गए, इसके बाद जून में पांच लोग संक्रमित पाए गए। लेकिन, जैसे ही जुलाई की शुरुआत हुई, प्रतिदिन कोरोना संक्रमित मरीज मिल रहे हैं। स्थिति यह है कि कभी-कभी एक दिन में 24 लोग कोरोना संक्रमित पाए जा रहे हैं। जिले में जांचों का दायरा बढ़ता जा रहा है। अप्रैल में एक दिन में दो सैंपल भेजे गए, जो अंत तब बढ़कर 15 तक पहुंच गए थे। इसी प्रकार मई की शुरुआत दो दर्जन सैंपल भेजे जा रहे थे, जो बाद में संख्या 30 तक पहुंच गई। जून में कोरोना संक्रमित जांचों का दायरा बढ़कर दो गुना हो गया।
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जुलाई में कोराना संक्रमण के बढ़ते मरीजों को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सैंपल लेने का दायरा भी बढ़ा दिया है। अब संख्य बढ़कर 300 के पार तक पहुंच गई है। जबकि लोग रिपोर्ट आने तक क्वारंटीन के नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। इससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है।
कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मरीजों को लेकर जांच का दायरा बढ़ाया गया है। शुरुआत में जहां 30 सैंपल लिए जा रहे थे, जिसके सापेक्ष अब 300 तक जा रहे हैं।
- डॉ. प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
झांसी में जांचें अधिक होने से रिपोर्ट में देरी
जिलाधिकारी ने दी जानकारी
ललितपुर। जिलाधिकारी योगेश कुमार शुक्ल ने प्राइवेट चिकित्सकों के साथ बैठक कर कहा कि जनपद के सैंपल की जो रिपोर्टें लंबित चल रही हैं, उसका प्रमुख कारण झांसी में कई जिलों के सैंपलों की जांच होना है। जरूरत पड़ने पर होटलों में भी मरीजों को क्वारंटीन किया जाएगा।
कलेक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में उन्होंने कहा कि कोरोनाकाल में प्राइवेट चिकित्सकों ने प्रशासन का बहुत सहयोग किया है। आज के परिवेश में सबसे अहम जिम्मेदारी है कि संक्रमण की चेन को तोड़ा जाए। एएनएम, आशा, सेक्रेटरी एवं लेखपालों के माध्यम से कोविड-19 विशेष सर्विलेंस अभियान चलाया जा रहा है। टीमें घर- घर जाकर लोगों के स्वास्थ्य की जानकारी ले रही हैं। एंटीजन टेस्ट शुरू होने से समस्याओं में काफी कमी आएगी।
बैठक में अस्पतालों को बेरीकेटिंग नहीं कर कंटेंमेंट जोन के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनाने का भी आश्वासन दिया गया। यदि किसी नर्सिंग होम के डॉक्टर या किसी को कोविड टेस्ट पॉजिटिव आता है तो उनके बाकी स्टाफ और डॉक्टर की जांच तुरंत ट्रू- नाट मशीन और फास्ट एंटीजन मशीन से कराई जाएगी।
जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि जैसा सम्मान सरकारी डॉक्टरों को दिया जा रहा है, वैसा ही सम्मान निजी चिकित्सकों को दिया जाएगा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रताप सिंह ने बताया कि जनपथ में ट्रू- नेट मशीन से उन्हीं मरीजों की जांच की जाएगी, जो ऑपरेशन के लिए लाए गए हैं। ट्रू-नेट मशीन और एंटीजन टेस्ट के लिए नोडल डॉक्टर नियुक्त किया जाएगा, जो इस बात का ध्यान रखेगा कि सिर्फ ऑपरेशन के लिए लाए गए मरीजों की ही ट्रू- नेट मशीन से जांच हो। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार पांडेय, डॉक्टर कौर, डॉ राजकुमार जैन, डॉ राजीव जैन, डा. केके जैन, डॉ. एसपी पाठक, डॉ. अनुपम मिश्रा, डॉ. संजीव कंडकी, डॉ. आलोक जैन, डॉ. विकास जैन आदि उपस्थित रहे।
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