ललितपुर। सूबे में संघर्ष कर रही कांग्रेस जनपद में अपना पुराना जनाधार भी नहीं बचा सका। इस बार सदर और महरौनी विधान सभा क्षेत्र में कांग्रेस की जमानत तक जप्त हो गई है। हैरत की बात तो यह है कि सदर क्षेत्र में कांग्रेस से ज्यादा वोट तो जन अधिकार पार्टी की प्रत्याशी वंदना को(4475) मिल गए। यह स्थिति तब है जबकि पार्टी के जिलाध्यक्ष बलवंत सिंह राजपूत खुद टिकट लेकर मैदान में थे इसके बाद भी उन्हें 3920 मत ही मिले जबकि महरौनी में बृजलाल खाबरी को 4344 मत ही मिले।
कभी कांग्रेस का गढ़ रहे महरौनी विधान सभा क्षेत्र में वर्ष 1996 में पूरन सिंह बुंदेला 79789 मत पाकर विजयी हुए थे। इसके बाद अब तक हुए पांच चुनावों में कांग्रेस दूसरे और तीसरे स्थान पर ही रही। वर्ष 2017 के चुनाव में कांग्रेस ने बृजलाल खाबरी को टिकट देकर मैदान में उतारा तो उन्हें 43171 मत मिले थे जो कि 19.67 रहे। पार्टी ने इस उम्मीद से उन्हें मैदान में उतारा कि पुराना वोट बैंक ही सुरक्षित रह जाए लेकिन इस बार तो उतने वोट भी नहीं मिले। इधर, सदर विधान सभा क्षेत्र में यही हाल रहा। वर्ष 2012 के चुनाव में पार्टी ने वीरेंद्र सिंह बुंदेला को टिकट देकर मैदान में उतारा था उन्हें 30270 मत मिले लेकिन 2017 में सपा से पार्टी का गठबंधन होने के कारण कोई प्रत्याशी नहीं उतरा। नतीजतन इस बार जो वोट था वह भी खिसक गया। लोधी मतदाताओं का हवाला देते हुए पार्टी ने खुद टिकट लेकर चुनाव लड़ा तो उन्हें 3920 वोट ही मिले। गौरतलब हो कि किसानों की खाद के लिए लड़ाई में पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद यहां आई और मृत किसानों के घरों पर जाकर उनके दुखदर्द सुन खाद उपलब्ध कराने के साथ ही चार परिवारों को 17 लाख रुपये की आर्थिक मदद भी की। उम्मीद थी कि पार्टी की ओर से इस सहयोग के लिए किसान कांग्रेस के साथ आ सकता है लेकिन नतीजा सिफर रहा।
जनता के जनादेश को स्वीकार्य करता हूं। पिछले बार की स्थितियां अलग थी जबकि इस बार की कुछ अलग परिस्थितियां रही हैं। समीक्षा के बाद सही कारण साफ हो सकेंगे।-बृजलाल खाबरी, कांग्रेस प्रत्याशी