वर्ष 2008-09 में स्वीकृत भौंरट बांध परियोजना के अंतर्गत अधिग्रहीत की गई भूमि का बढ़ा हुआ मुुआवजा की मांग को लेकर किसानों ने बुधवार को जंगी प्रदर्शन किया। प्रशासन द्वारा मांग न मानने पर क्षुब्ध एक किसान बांध में कूद गया, जिसे आनन-फानन में पानी से बाहर निकाला गया। हालत खराब देख उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना से नाराज महिलाएं हंसिया व ग्रामीण लाठियां लेकर मौके पर इकट्ठा हो गए। स्थिति देखते हुए प्रशासन ने बांध का काम रुकवा दिया है।
ग्रामीणों के विरोध के चलते बांध निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। ग्रामीण भूमि अधिग्रहण बिल के अनुसार नयी शासकीय दरों पर बढ़ा हुआ मुआवजा दिलाने की मांग कर रहे हैं। वहीं, सिंचाई विभाग द्वारा किसानों को नयी दरों पर मुआवजा वितरित किये जाने में लगातार असमर्थता जताई जा रही है, जिससे किसानों में विभागीय अफसरों के प्रति आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। बुधवार दोपहर भौंरट बांध निर्माण स्थल पर सिंचाई विभाग द्वारा कार्य शुरू कराने की कोशिश की गयी लेकिन ग्राम भैरा, बम्हौरी घाट और भौंरट सतलींगा गांव के किसानों ने एकत्रित होकर पुन: काम रुकवा दिया।
सूचना पाकर मौके पर एसडीएम महरौनी, पुलिस क्षेत्राधिकारी , कोतवाली प्रभारी और पुलिस बल मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने कहा कि जब किसान एक बार अपनी जमीन का बैनामा पूर्व में कर चुके हैं तो अब उनका इस भूमि पर कोई अधिकार नहीं है। इसके लिये उनको जो मुआवजा पूर्व में दिया गया है ,उससे अधिक नहीं दिया जा सकता है। ऐसे में किसानों से शांतिपूर्वक पीछे हटने और निर्माण कार्य में व्यवधान न डालने की अपील की गयी। अन्यथा की स्थिति में कानूनी कार्यवाही किये जाने की चेतावनी दी गयी। ग्रामीणों ने अधिकारियों के समक्ष अपनी व्यथा सुनाई और बताया कि सात साल पहले उनकी कीमती जमीन को तत्कालीन विभागीय अधिकारियों द्वारा गुमराह करके 80 हजार रुपये प्रति एकड़ की सस्ती दरों पर खरीद लिया गया। आश्वासन दिया गया कि बाद में किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा दिया जायेगा।
किसानों ने बताया कि तत्कालीन अधिकारियों के आश्वासन पर भरोसा करके जमीन दे दी थी लेकिन अब उनके साथ छलावा हुआ है। जब तक उनको बढ़ी हुई दरों पर मुआवजा नहीं दिलाया जायेगा तब तक वह काम शुरू नहीं होने देंगे और इसके लिये मरने के लिये भी तैयार हैं। इसके बाद प्रशासन द्वारा कार्य शुरू कराये जाने की बात कही गयी तो किसान आक्रोशित हो गये। इसी दौरान ग्राम भैरा निवासी गब्बर (24) पुत्र दुज्जे ने क्षुब्ध होकर दोपहर लगभग 2 बजे निर्माणाधीन बांध में अधिकारियों के सामने ही छलांग लगा दी और वह पानी में डूबने लगा। यह देखकर प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए। शीघ्र ही कुछ ग्रामीणों ने डूबते हुये युवक को पानी से बाहर निकाला और आनन फानन में पुलिस के वाहन से उसे उपचार हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र महरौनी पहुंचाया।
इस घटना के बाद तो किसानों का विरोध प्रदर्शन उग्र रूप लेने लगा। दर्जनों महिलायें हाथों में हंसिया व लाठी डंडे लेकर आगे आ गयीं। प्रशासनिक वाहनों के आगे खडे़ होकर आक्रोशित भीड़ ने जमकर नारेबाजी की। किसानों का कहना था कि वह आर- पार की लड़ाई के लिये तैयार हैं और मर मिटने में भी पीछे नहीं हटेंगे जब तक कि उनकी मांग पूरी नहीं होगी।
भारी विरोध के माहौल में प्रशासनिक अधिकारियों ने सूझबूझ से काम लेते हुए स्थिति पर काबू पाया। किसानों के प्रतिनिधि मंडल को सामंजस्य हेतु बातचीत करने के लिये राजी किया। बांध कालोनी में हुई बैठक के दौरान प्रशासन ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि वह किसानों की बात शासन तक भेजेंगे और जब तक समस्या का कोई हल नहीं निकलता है तब तक बांध निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया जायेगा। इस बात पर आक्रोशित ग्रामीण शांत हुए।