देश में 500 व 1000 रुपए के नोटों का चलन बंद होने पर सबसे ज्यादा असर शादी-विवाह समारोह व तैयारियों पर पड़ा है, लेकिन जनपद में शादी-विवाह समारोह उधारी पर ही आयोजित होंगे। क्योंकि लोगों के पास हलवाई, फर्नीचर व्यापारियों, सर्राफा व्यापारियों, विवाह घर-मेरिज गार्डन, बैंड बाजा व डीजे वालों व अन्य लोगों का भुगतान करने के लिए न तो खुल्ले रुपए हैं और न ही नई करेंसी है।
केंद्र सरकार ने 500 व 1000 रुपए के नोट को बंद कर दिया है। इसका शादी-विवाह के आयोजन पर बुरा असर पड़ा है। बैंक से खुल्ले रुपए व नई करेंसी एक्सचेंज करने की सीमा चार हजार रुपए निर्धारित की गई है। खाते से एक सप्ताह में केवल बीस हजार रुपए निकाले जा सकते हैं। यह राशि शादी-विवाह समारोह में व्यय करने के लिए बहुत कम है, जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लोग बड़े-बड़े सामानों की खरीद का भुगतान तो चेक से कर देंगे, लेकिन जो छोटे-छोटे सामानों व नेग और रीति रिवाजों में हजारों रुपए खर्च होते ही वह कहां से लाएंगे। वहीं इसका असर टेंट-शामियाना वालों, शादी घर व मेरिज गार्डन वालों, बैंक बाजा व डीजे वालों, हलवाई, सर्राफा व्यापारियों व सजावट करने वाले व्यापारियों के व्यापार पर भी पड़ा है।
बेटे की शादी व व्यापार दोनों पर आफत
सिविल लाइन क्षेत्र में रहने वाले फर्नीचर व्यापारी कांशीराम साहू बताते हैं कि 500 व 1000 हजार रुपए के नोटों का चलन बंद होने के कारण उनके व्यापार व पुत्र के विवाह की तैयारियों पर असर पड़ा है। लोग पलंग, सोफा आदि सामान खरीदने तो आ रहे हैं, लेकिन खुल्ले रुपए व नई करेंसी नहीं होने के कारण कोई भी ग्राहक भुगतान करने को तैयार नहीं है। ग्राहक भुगतान के लिए दस से बीस दिनों तक की मोहलत मांग रहे है। मजबूरी में उधारी पर व्यापार करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि दस दिन बाद उनके पुत्र का विवाह है, जिसमें नकदी की समस्या आएगी। और काम तो निपट जाएंगे लेकिन सब्जी आदि खरीदने में नकदी की समस्या आएगी।
- हलवाई बोले कर्मियों को कैसे देंगे मजदूरी
हलवाई हनुमत कुशवाहा बताते हैं कि जो पार्टी आ रही है वह साफ कह रही है कि भुगतान कुछ दिनों के बाद किया जाएगा। पार्टी से चेक लेकर बुकिंग कर देंगे, लेकिन वह अपनी लेवर को भुगतान कैसे करेंगे यह समस्या आड़े आ रही है।
-सोना हुआ फीका
वर्तमान में लोगों को खरीदने के लिए सोना नसीब नहीं हो रहा है और जहां मिल भी रहा है तो मनमाने दामों पर बेचा जा रहा है, जिसे गरीब व मध्यम वर्ग के लोगों को खरीद पाना सामान्य बात नहीं है।
-बैंक में क्या देगें जवाब, यह भी बड़ी चिंता
बैंड बाजा, डीजे, टेंट, शामियाना, लाइटिंग, फूल सजावट आदि कारोबारियों ने बताया कि वह अपने व्यापार के लिए बड़े नोट ले तो लेंगे, लेकिन जब वह बैंक में इन रुपयों को जमा कराएंगेतो बैंक के सवालों का जवाब देना पड़ेगा। इस मुश्किल से अच्छा होगा कि बड़े नोटों को मना ही कर दें। उधारी में व्यापार करना पड़ेगा।