संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। कथा व्यास धनवंतरि महाराज ने कहा कि जीवन में संस्कारों का बड़ा महत्व है। संतान को संस्कार युक्त बनाने के लिए मां-बाप को जागरूक होना होगा। संतान को धन से अधिक सुसंस्कारों की आवश्यकता है। संस्कारों से ही धर्म एवं धर्म की सारी मर्यादाओं का पालन होता है। वह सोमवार को श्रीलक्ष्मी नृसिंह मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का वर्णन कर रहे थे।
कथा व्यास ने कहा कि संत, गो, गंगा, गीता एवं गायत्री के सम्मान के लिए संस्कार युक्त संतान आवश्यक है। संस्कारशाली नागरिक राष्ट्र व धर्म के साथ परिवार की उन्नति का भी आधार होता है। बच्चों को प्रारंभ से ही संस्कार दें, श्रीमद्भागवत महापुराण में भगवान श्रीकृष्ण के सोलह हजार एक सौ आठ विवाहों का वृतांत मिलता है। प्रभु की यह भी कृपा लीला है।
उन्होंने कहा कि प्रभु सदैव भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। शास्त्र कहता है कि भगवान भक्त के वश में होते हैं। आज के समय में हम संबंधों को महत्व नहीं देते, लेकिन प्रभु श्री कृष्ण अपने बचपन के मित्र सुदामा का विधिवत सम्मान करते हैं। प्रभु तो दीनानाथ हैं, दीनदयाल हैं। सुदामा जी संतोषी महात्मा हैं। वह द्वारकाधीश से मिलने पहुंचे, सुदामा को देखकर प्रभु श्री कृष्ण भावुक हो जाते हैं। अपने नेत्रों के जल से अपने मित्र स्वरूप भक्त का सम्मान करते हैं। दो मुट्ठी भर चावल ग्रहण करते ही प्रभु ने अपने मित्र को वैभव शाली बना दिया। यही प्रभु का संदेश है कि जीव मेरी ओर आकर देखे मैं अपने भक्त का सब कुछ संवार दूंगा।
कथा में मुख्य यजमान सुमन संजय ड्योडिया, सदर विधायक रामरतन कुशवाहा, प्रदीप चौबे, ओमप्रकाश शास्त्री, सरदार बीके, भगवत नारायण बाजपेयी, रमेश रावत, सुभाष जायसवाल आदि मौजूद रहे।