ललितपुर। जिला अस्पताल के हाल- बेहाल हैं। तीन ऐसे मामले सामने आए, जिन्होंने व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। स्थिति यह रही कि मासूम बच्चे को खून के लिए उसके परिजन रात भर भटकते रहे और जिला अस्पताल का स्टाफ खून देने से मना करते रहे। वहीं, एक महिला ने महिला अस्पताल के गेट पर प्रसव कर दिया, जबकि एक अन्य मामले में तीन महीने पहले गर्भवती महिला के सिजेरियन ऑपरेशन के बाद उसके पेट में औजार छोड़ दिए और फिर परिजनों को बिना बताए आपरेशन कर दिया गया।
केस - 1
खून को किया परेशान
अपनी मासूम बच्ची के इलाज के लिए सोमवार की रात को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक कर्मियों ने मरीज के पिता को काफी परेशान किया। नगर के कसाई मंडी निवासी साबिर अपनी छह साल की पुत्री सना की बीमारी का इलाज बाल रोग विशेषज्ञ डा. विकास जैन के पास करा रहे थे। बच्ची की हालत काफी कमजोर और गंभीर देखते हुए उसे मिशन अस्पताल में भर्ती कराया गया। बच्ची का हीमोग्लोबिन केवल 2.6 था, जो सामान्य स्थिति में दस के ऊपर रहना चाहिए। गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सक ने दो यूनिट ए पॉजिटिव ब्लड ग्रुप की आवश्यकता बताई। बच्ची के पिता जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक पहुंचे, लेकिन वहां के कर्मचारियों ने खून देने से मना कर दिया। इस मामले की जानकारी डा. विकास जैन ने जिला अस्पताल के सीएमएस डा. संजय वासवानी को दी। सीएमएस के हस्तक्षेप के बाद करीब दो घंटे बाद मरीज को खून उपलब्ध हो सका। पीड़ित ने मामले की शिकायत जिलाधिकारी डा. रुपेश कुमार से की, जिस पर जिलाधिकारी ने सीएमओ से जांच कराकर रिपोर्ट देने को कहा है।
केस- 2
गेट पर हुआ प्रसव
महरौनी तहसील के ग्राम गोगला निवासी रामेश्वर सोमवार की दोपहर करीब बारह बजे अपनी गर्भवती पत्नी सीमा को प्रसव के लिए जिला महिला अस्पताल लाए। गर्भवती को भर्ती करने और इलाज के लिए महिला अस्पताल के स्टाफ ने लापरवाही बरती। इसी दौरान सीमा को प्रसव पीड़ा होने लगी। महिला के परिजनों ने प्रसव पीड़ा की जानकारी ड्यूटी पर तैनात स्टाफ को दी, लेकिन कोई भी महिला के इलाज के लिए नहीं आया। इससे गर्भवती ने गेट पर ही लड़की को जन्म दे दिया। गेट पर प्रसव की सूचना मिलने पर महिला अस्पताल स्टाफ में हड़कंप मच गया और जच्चा व बच्चा को तुरंत इलाज दिया जाने लगा। प्रसूता की हालत को बिगड़ते देख चिकित्सकों ने सीमा को झांसी रेफर कर दिया।
केस- 3
पेट में छोड़ा औजार
कोतवाली अंतर्गत मुहल्ला सरदारपुरा निवासी चंद्रशेखर सैनी ने मंगलवार को जिला अस्पताल की कार्य प्रणाली की उजागर की है। उसने बताया कि 25 जुलाई को उसने अपनी गर्भवती पत्नी ज्योति को महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। प्रसव में परेशानी होने के कारण गर्भवती का सिजेरियन ऑपरेशन किया गया। तीन अगस्त को अस्पताल से छुट्टी कर दी गई। घर पहुंचने पर पत्नी को पेट में तकलीफ हुई। पत्नी ने बताया कि उसके पेट में किसी नुकीली चीज होने की आशंका है। इस पर चार अगस्त को दोबारा महिला अस्पताल में पत्नी को दोबारा भर्ती कराया। चार अगस्त की रात में ही परिजनों को बिना बताए महिला का ऑपरेशन कर दिया गया। पेट से क्या निकला, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई। पीड़ित का कहना है कि महिला अस्पताल की इस लापरवाही की शिकायत वह उच्च स्तर पर करेगा। हालांकि, मामला अगस्त का है, ऐसे में इतने दिन बाद बात को उछालना समझ से परे है।
इनका कहना है,
अभी उनके संज्ञान में कोई मामला नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी होगा, कार्रवाई की जाएगी।
- डा. हरेंद्र चौहान
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
महिला अस्पताल