बेसिक स्कूलों का करीब दस हजार छात्रांकन कम हो जाने से विभाग में हड़कंप मच गया है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल के छात्रांकन में आई कमी के अंतर को कम करने के आंकड़ेबाजी का खेल आरंभ हो गया है। वहीं, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सहित खंड शिक्षा अधिकारी वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुट गए हैं।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत चलाए जा रहे लुभाने कार्यक्रम बच्चों को आकर्षित नहीं कर पा रहे हैं। इस साल प्राथमिक विद्यालयों में एक लाख 19 हजार दो सौ बीस व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में उन्सठ हजार नौ सौ उन्हत्तर छात्रांकन हो गया है जो गत वर्ष के मुकाबले करीब दस हजार कम है। जिससे विभागीय अफसरों का चैन छिन गया है। राज्य परियोजना कार्यालय सर्व शिक्षा अभियान इस मामले की समीक्षा में जुटा है। वहीं, विभागीय कर्मियों ने छात्रांकन के अंतर को कम करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। ब्लाक स्तर पर छात्रांकन की रिचेकिंग की जा रही है, साथ ही लिपिकीय त्रुटि आदि पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जिससे कर्मियों को छात्रांकन के अंतर को कम करने की संभावनाएं नजर आने लगी हैं।
आधार के इस्तेेमाल से और घटेगा नामांकन
परिषदीय विद्यालयों में अगले सत्र से बच्चों के नामांकन में आधार कार्ड लगना आरंभ हो जाएगा। ऐसी स्थिति में फेक छात्रांकन नहीं हो सकेगा, जो नामांकन गिरने का कारण बनेगा। वर्तमान में दर्जनों विद्यालय ऐसे हैं, जहां नामांकन के सापेक्ष बच्चों की उपस्थिति 40 प्रतिशत के आसपास ही रहती है। इन हालात में फेक छात्रांकन होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।