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नवीन ग्राम पंचायतों में ही बंटेगा सस्ता अनाज

Wed, 17 Aug 2016 02:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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anaz, lalitpur news - फोटो : demo
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ललितपुर। नए परिसीमन के आधार पर जिले में गठित हुई ग्राम पंचायतों में जल्द ही कोटा की दुकानें खोली जाएगी। पूर्ति विभाग ने 42 ग्राम पंचायतों से नई दुकानों का प्रस्ताव मांगा है। जिसमें से 9 ग्राम पंचायतों से दुकान खोलने का प्रस्ताव आना बाकी है।
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जिले के 2 लाख 18 हजार 418 पात्र गृहस्थियों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा गारंटी योजना के दायरे में रखा गया है। इन परिवारों को हर माह सस्ता गेहूं, चावल उपलब्ध कराने की व्यवस्था उचित दर की दुकानों पर की गई है। पिछले चुनाव में ग्राम पंचायतों का नए परिसीमन किया गया, जिसमें ग्राम पंचायतों की संख्या 340 से बढ़कर 416 हो गई है। जिससे उचित दर की दुकानें बढ़ना लगभग तय माना जा रहा था, जिसकी तैयारी भी शुरू कर दिया है।   

पूर्ति विभाग ने 42 दुकानों का प्रस्ताव नई ग्राम पंचायतों से मांगा था, जिनमें से 9 ग्राम पंचायतों ने अभी तक प्रस्ताव पर विचार नहीं किया है। इनमें तहसील तालबेहट की ग्राम पंचायत कंधारीखुर्द, महरौनी तहसील की ग्राम पंचायत सुकलगुवां, प्यासा, ब्लाक बार अंतर्गत सूरीखुर्द, दैलवारा, ब्लाक बिरधा अंतर्गत छिल्ला, तालगांव, सगौरिया, निवऊआ शामिल हैं। जिन ग्राम पंचायतों से दुकान खोलने के प्रस्ताव पूर्ति कार्यालय को प्राप्त हो गए हैं, उनमें नई दुकान की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 
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21 दुकानें चल रही निरस्त
जनपद में 21 उचित दर की दुकानें निरस्त चल रही हैं। इनमें तहसील मड़ावरा अंतर्गत नैकोरा, रनगांव, पीडार, खुटगुवां, लिधौरा, भौटा, तहसील पाली में कलौथरा, मादौन, बंगरिया, दिगवार, पटना, महाराजपुरा, तहसील ललितपुर में रघुनाथपुरा, मिर्चवारा, तहसील महरौनी में नैगुवां, चंदावली, दैलवारा, मोगान, बुरौगांव सम्मिलित हैं। इन दुकानों के निरस्त होने से कार्डधारकों को राशन सामग्री लेने के लिए एक किलोमीटर या इससे अधिक की दूरी तय करनी पड़ रही है।

55 दुकानें हुईं निलंबित
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में गड़बड़ी के चलते 55 उचित दर की दुकानें निलंबित की जा चुकी हैं। यही नहीं, 10 दुकानों को निरस्त किया गया है। वहीं, 14 अभियुक्तों पर कार्रवाई की गई है। इसके अलावा 2 लाख 48 हजार 400 रुपये का जुर्माना बसूल किया गया है।

सम्बद्घीकरण का खेल
पूर्ति विभाग में इस समय कार्डधारकों को दूसरे राशन की दुकान से सम्बद्घीकरण का खेल चल रहा है। जब भी किसी दुकान पर कार्रवाई होती है, उसके पड़ोसी कोटेदार के चेहरे पर अजीब सी चमक आ जाती है और वह निलंबित या निरस्त दुकान के कार्डधारकों को अपने यहां सम्बद्घ कराने के लिए जोड़ तोड़ आरंभ करने लगता है। उस दौरान विभागीय अफसर कार्डधारकों की दूरी का ख्याल भी नहीं रखते। जिससे अंतत: परेशानी कार्डधारकों को ही झेलनी पड़ती है।
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