- दो वर्ष दस माह बाद भी नहीं एक भी विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती
- जांचें भी सीमित, गंभीर मरीज और प्रसूताओं को किया जा रहा रेफर
संवाद न्यूज एजेंसी
जखौरा/ललितपुर। ब्लॉक मुख्यालय जखौरा स्थित अस्पताल को सीएचसी का दर्जा मिले दो साल 10 महीने हो गए हैं। लेकिन, इतने समय में मानो सिर्फ अस्पताल का नाम ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हुआ है, सुविधाएं जस की तस हैं। यहां पर अब तक एक भी विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हो सकी है। वहीं जांचें भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी ही हैं।
जखौरा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को जनवरी 2023 में उच्चीकृत कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा दिया गया था। सीएचसी बनने के बाद लोगों को यहां सुविधाओं में इजाफे की भी उम्मीद थी। सीएचसी पर एक सर्जन, एक निश्चेतक चिकित्सक, एक बाल रोग विशेषज्ञ और एक स्त्री रोग विशेषज्ञ के पद स्वीकृत हैं। लेकिन, महज सामान्य चिकित्सकों के सहारे अस्पताल संचालित हो रहा है। गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार ही मिल पा रहा है। ऐसे में उन्हें मुख्यालय की ओर रुख करना पड़ता है। अस्पताल को न ही विशेषज्ञ चिकित्सक मिले और न ही यहां सिजेरियन प्रसव की सुविधा हो सकी। अस्पताल में बेडों की संख्या भी बढ़कर 30 न हो सकी।
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प्रतिमाह 10 से 15 प्रसूताएं हो रहीं रेफर
सीएचसी का दर्जा मिलने पर लोगों को सामान्य प्रसव के साथ ही सिजेरियन प्रसव की सुविधा शुरू होने की आस थी। लेकिन, न चिकित्सक मिले न ही सिजेरियन प्रसव की सुविधा शुरू हो सकी। ऐसे में प्रतिमाह 10 से 15 प्रसूताएं रेफर होती हैं।
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सीमित हैं जांच की सुविधा, धूल फांक रही मशीनें
सीएचसी पर जांच की सुविधाओं में भी विस्तार नहीं हो सकी है। अब भी केएफटी, एलएफटी व लिपिड प्रोफाइल समेत अन्य जांचें नहीं होती हैं। यही नहीं बीते वर्षों में अल्ट्रासाउंड व डिजिटल एक्स-रे जांच की सुविधा को मशीनें उपलब्ध कराई गई थीं। लेकिन वर्तमान में मशीनें कक्षों व बाहर बरामदा में धूल फांक रही हैं।
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सीएचसी पर विशेषज्ञों के सभी पद रिक्त चल रहे हैं। वर्तमान में तीन चिकित्सक कार्यरत है। संबंध में उच्च अधिकारियों को पत्राचार किया गया है।
- डॉ. समीर प्रधान, चिकित्सा अधीक्षक, सीएचसी, जखौरा