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Lalitpur News: रॉक फॉस्फेट खनन केंद्रीय टीम ने पिसनारी और टोरी गांव का किया स्थलीय निरीक्षण

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रनगांव/मड़ावरा (ललितपुर)। तहसील क्षेत्र के पिसनारी और टोरी गांव के वन क्षेत्र में रॉक फॉस्फेट के खनन की प्रक्रिया आगे बढ़ने लगी है। मंगलवार को भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की उच्चस्तरीय केंद्रीय टीम ने प्रस्तावित खनन क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। टीम ने वन क्षेत्र की स्थिति के साथ खनन से पर्यावरण और वन्यजीवों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का जायजा लिया। बुधवार को टीम बार और तालबेहट क्षेत्र में भी निरीक्षण करेगी।
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केंद्रीय टीम ने वन विभाग के अधिकारियों के साथ प्रस्तावित खनन क्षेत्र का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान वन क्षेत्र, जैव विविधता और वन्यजीव सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जमीनी स्थिति देखी गई। टीम ने खनन परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय पहलुओं को भी समझा। निरीक्षण की रिपोर्ट और आगे की प्रक्रिया के आधार पर परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।
रॉक फॉस्फेट उर्वरक निर्माण के लिए महत्वपूर्ण खनिज है। इसका इस्तेमाल फॉस्फोरस आधारित उर्वरकों के निर्माण में होता है। देश में इसके घरेलू भंडार और उत्पादन में बढ़ोतरी से आयातित कच्चे माल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। ऐसे में ललितपुर क्षेत्र में संभावित भंडार को खनिज और कृषि क्षेत्र की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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निरीक्षण के दौरान केंद्रीय टीम में सहायक महानिरीक्षक अमनदीप के नेतृत्व में अन्य सदस्य शामिल रहे। उनके साथ डीएफओ नवीन कुमार शाक्य, एसडीओ सतेंद्र सिंह, क्षेत्रीय वन अधिकारी मुहम्मद नदीम, डिप्टी रेंजर महेंद्र कुमार सहित वन विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

स्थानीय स्तर पर बढ़ सकती हैं आर्थिक गतिविधियां
परियोजना शुरू होने पर खनन से जुड़े प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। स्थानीय स्तर पर परिवहन, मशीनरी, निर्माण, खान-पान और अन्य सेवाओं से जुड़े कारोबार को भी बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि रोजगार और आर्थिक लाभ का वास्तविक स्तर परियोजना के आकार, खनन क्षमता और संचालन शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

पर्यावरणीय पहलू भी अहम
प्रस्तावित खनन क्षेत्र वन क्षेत्र में होने के कारण पर्यावरणीय मंजूरी इस परियोजना का महत्वपूर्ण चरण है। खनन शुरू होने से पहले वन, वन्यजीव, जैव विविधता और स्थानीय पर्यावरण पर संभावित प्रभावों का आकलन किया जाना है। केंद्रीय टीम का स्थलीय निरीक्षण इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन और आवश्यक स्वीकृतियां मिलने के बाद ही खनन गतिविधियां आगे बढ़ सकेंगी।
इसलिए महत्वपूर्ण है यह निरीक्षण
केंद्रीय टीम के निरीक्षण के बाद परियोजना से जुड़ी पर्यावरणीय रिपोर्ट और अन्य औपचारिकताएं आगे बढ़ेंगी। इसके बाद आवश्यक मंजूरियों के आधार पर खनन शुरू करने की प्रक्रिया तय होगी। लंबे समय से प्रस्तावित परियोजना के लिए मंगलवार का निरीक्षण इसलिए महत्वपूर्ण है कि इससे खनन क्षेत्र की जमीनी स्थिति का आकलन सीधे किया गया है।
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नवीन कुमार शाक्य, डीएफओ
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