संवाद न्यूज एजेंसी सिलावन (महरौनी)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महरौनी में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। यहां वर्षों से सीबीसी (कंपलीट ब्लड काउंट) जांच नहीं हो रही है। 15 दिनों से कार्ड के अभाव में टाइफाइड की जांच भी ठप पड़ी है। मरीजों को मजबूरन बाहर जांच करानी पड़ रही है। वहीं, मरीजों और तीमारदारों को वाटर कूलर के अभाव में या तो प्यासा रहना पड़ रहा है या फिर टंकी का गरम पानी पीना पड़ रहा है।
महज सात दिन हो सकी थी जांच : सरकार ग्रामीणों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर सीबीसी के साथ शुगर, मलेरिया, एचआईवी, डेंगू, सर्वाइकल कैंसर, हेपेटाइटिस बी, फाइलेरिया आदि जांच की सुविधा निशुल्क मुहैया करा रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महरौनी में वर्ष 2020 में सीबीसी जांच मशीन स्थापित की गई थी। लेकिन, यह जांच महज सात दिन तक ही चल सकी, तब से अब तक सीबीसी जांच ठप पड़ी है।
यहां आने वाले 200-250 मरीजों में से 20-30 को बाहर जांच कराने जाना पड़ रहा है। लगभग इतनी ही गर्भवतियों को निजी केंद्र पर सीबीसी जांच करानी पड़ रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर स्थापित निजी लैब पर प्रतिदिन 50 से 60 मरीजों की सीबीसी जांच होती है, इनमें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आने वाले मरीजों की संख्या ज्यादा रहती है। केंद्र पर सीबीसी जांच शुरू हो जाती तो मरीजों को महंगी जांच से राहत मिल जाती।
कार्ड के अभाव में टाइफाइड की जांच भी ठप : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर कार्ड के अभाव में 15 दिनों से टाइफाइड और मलेरिया जैसी जांच भी ठप पड़ी हुई है। स्वास्थ्य केंद्र पर जांच न होने से मरीजों को मजबूरन निजी केंद्र पर जांच करानी पड़ रही है। इसमें मरीजों का पैसा और समय दोनों खर्च हो रहा है।