शहर में नो पार्किंग की जगह तो चिह्नित कर ली गई है, लेकिन पार्किंग कहां की जाए यह स्थल अभी नहीं ढूंढे जा सके हैं। मुख्य बाजार में तो हालात बहुत खराब हैं। यहां फुटपाथ पर भी दुकानदारों ने अतिक्रमण कर लिया है। इस कारण सड़क पर वाहन खड़े किए जाते हैं, जिससे जाम लगना आम है। जनप्रतिनिधियों, विभिन्न संगठनों और प्रशासन ने इस समस्या के समाधान का प्रयास किया, लेकिन अभी तक सफलता हासिल नहीं हो सकी है।
ललितपुर को जिला बने हुए 40 वर्षों से अधिक समय बीत गया है। इस बीच शहर के विकास के नाम पर और जनता की सुविधा के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन शहरवासियों का दुर्भाग्य है कि शहर में कहीं पर भी सार्वजनिक वाहन पार्किंग नहीं बनाई गई है।
मुख्य बाजार क्षेत्र में अधिक समस्या उठानी पड़ती है। एक तो शहर में कहीं पर भी पार्किंग स्थल नहीं है ऊपर से दुकानदार भी सड़क के फुटपाथ पर अतिक्रमण करके बैठ जाते हैं, जिससे वाहन स्वामियों को मजबूरन सड़क पर वाहन खड़ा करना पड़ता है। पार्किंग स्थल नहीं लेकिन पुलिस प्रशासन द्वारा नो पार्किंग जोन स्थल जरुर चिह्नित कर दिए गए हैं, घंटाघर से लेकर आजादचौक तक वाहन पार्किंग नहीं करने दी जाती है, साथ ही सड़कों पर वाहन पार्किंग करने वालों को जुर्माना तक देना पड़ता है। पुरानी सदर तहसील चौराहे से आजादचौक तक व घंटाघर से पानी की टंकी तक पार्किंग के अभाव में हमेशा की जाम की स्थिति बनी रहती है। वाहन पार्किंग के अभाव में स्थानीय व्यापारियों से लेकर बाजार खरीदारी करने के लिए आने वाले लोगों, राहगीरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। विडंबना है कि पार्किंग की समस्या को सभी जन समस्या बने तो हैं, लेकिन इस समस्या का निस्तारण करना कोई नहीं चाहता है। सड़के के किनारे बने फुटपाथ को अतिक्रमण से मुक्त कर दिया जाए और प्राधिकरण से स्वीकृति कॉपलेक्स भवनों की पार्किंग स्थलों को खोल दिया जाए तो काफी हद तक इस समस्या से निजात मिल सकती है।
यातायात माह का व्यापार संगठन करेगा बहिष्कार
वाहन पार्किंग की समस्या वर्षों से चली आ रही है। पुलिस प्रशासन व जिला प्रशासन द्वारा अनेकों बार इस समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया गया है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। विगत नवंबर माह में आयोजित यातायात माह के शुुभारंभ कार्यक्रम में व्यापार संगठन द्वारा सार्वजनिक मंच से इस समस्या को रखा गया था। जिस पर तत्कालीन एएसपी ने तीन दिनों के भीतर संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक करके इस समस्या का समाधान निकालने का आश्वासन दिया था, लेकिन चार माह बीतने वाले हैं अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पूरा व्यापार संगठन इस बात से नाराज है और आगामी यातायात माह का व्यापार संगठन सार्वजनिक रूप से बहिष्कार रकेगा और विरोध प्रदर्शन करेगा।
-मनमोहन जड़िया
जिला अध्यक्ष, संयुक्त व्यापार संगठन।
प्रशासन की उदासीनता मैन वजह
शहर के मुख्य बाजार में वाहन पार्किंग व अतिक्रमण की जो समस्या है, उसकी पीछे प्रशासन की उदासीनता मुख्य वजह है। शहर में एक भी निजी मार्केट व कॉपलेक्स ऐसा नहीं है जहां पर नियमानुसार पार्किंग स्थल की व्यवस्था हो। पार्किंग स्थल स्वीकृति कराकर वहां दुकानें व गोदाम संचालित की जा रही है। खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और सड़कों पर खड़े हो रहे वालों से जनता परेशान हो रही है, लेकिन जिला प्रशासन व प्राधिकरण विभाग के अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों व जनता की समस्या से कोई सरोकार नहीं है।
-किशोर बरया
अतिक्रमण में खो गए फुटपाथ
घंटाघर से लेकर वीर सावरकर चौक तक का क्षेत्र शहर का मुख्य मार्ग है। इस बीच मुख्य सड़क के किनारे दोनों ओर काफी चौड़े-चौड़े फुटपाथ बने हुए हैं, लेकिन स्थानीय व्यापारियों द्वारा कर लिए गए अतिक्रमण के कारण यह फुटपाथ खो गए हैं। यदि इन फुटपाथों को अतिक्रमण से मुक्त करा दिया जाए तो सड़कों पर वाहन खड़े होने बंद हो जाएगें और यातायात भी बाधित नहीं होगा। इसी तरह शहर के अन्य चौराहों व सार्वजनिक स्थलों पर भी फुटपाथ पर अतिक्रमण काबिज है, जिसे हटाने से वाहन पार्किंग के लिए कुछ तो राहत मिल ही सकती है। नगर पालिका व पुलिस प्रशासन को इस ओर गंभीरता दिखानी चाहिए।
-रत्नेश तिवारी
पूर्व पार्षद।
नगर पालिका खुद किए हैं पार्किंग बंद
नगर व नागरिकों की समस्या को निस्तारण कराने की जिम्मेदारी नगर पालिका की है। जहां शहर में हर जगह वाहन पार्किंग स्थल की समस्या है, वहां मुख्य बाजार में घंटाघर के पास स्थित नगर पालिका के डा. शादीलाल कांपलेक्स के बेेसमेंट में वाहन पार्किंग स्थल बना हुआ है। लेकिन नगर पालिका इस पार्किंग स्थल पर ताला डाले हुए है। इसी भवन में नगर पालिका का कार्यालय संचालित होता है, कांपलेक्स में स्थित दुकान दार, विभागीय कर्मी व आने-जाने वाले लोग बाहर की सड़कों पर वाहन खड़े कर देते हैं। इससे भी यातायात बाधित होता है।
- संकेत विश्वारी