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बुंदेलखंड में पानी की बूंद- बूंद बचाना जरूरी

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विकास भवन में आयोजित कार्यशाला में अपर पुलिस महानिदेशक महेंद्र मोदी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण मानव का मौलिक कर्तव्य है। जल ही जीवन है, भारतीय संस्कृति में जल देवता हैं। सेवा के कई तरीके हैं। जल संरक्षण प्रकृति की बडी सेवा है। सरकारी योजनायें जन सहयोग मांगती हैं। रिचार्ज कूप से पानी इकट्ठा किया जा सकता है। परंपरागत ज्ञान आधुनिक ज्ञान से सर्वोपरि है। मुख्य विकास अधिकारी अरुण कुुमार उपाध्याय ने कहा कि इस क्षेत्र में बरसात बहुत कम होती है, इसीलिए पानी बचाने के लिए हर गांव में तालाब संस्कृति को पुन:स्थापित करना होगा। बुंदेलखंड में महिलाओं के ऊपर उम्र के साथ- साथ सिर के ऊपर पानी के घडों का वजन भी बढता जाता है, जिसका स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। डीडीएम नाबार्ड विवेक कुमार गुप्ता ने खनिज क्षेत्र में पानी बचाने के सफल मॉडल का प्रस्तुतीकरण किया तथा कम लागत से खदान क्षेत्रों में पानी बचाने के ढाचे बनाये जाने की अपील की।
जल जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह ने कहा कि बुंदेलखंड में समय रहते जलसंरक्षण के कार्य नहीं किये गए तो वर्ष 2030 तक 40 प्रतिशत आबादी को पीने का पानी उपलब्ध नहीं होगा। इसलिये पानी बचाने का कार्य समाज को मिलकर करना होगा। जल सहेली रामवती और ललीता ने तालबेहट क्षेत्र की जानकारी प्रस्तुत की।
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अजय श्रीवास्तव ने कहा कि ललितपुर में स्वयं सेवी संस्थाओं के रचनात्मक प्रयासों में खेत तालाब मेंड बंधी करके गरीब आदिवासी समुदायों के बीच कृषि आधारित आजीविका के प्रयास किये जा रहे हैं। कार्यक्रम में सुरेंद्र नारायण शर्मा और अनिल पटैरिया ने भी विचार प्रकट किए। बुंदेलखंड सेवा संस्थान के वासुदेव ने कहा कि ललितपुर जनपद बडे- बडे बाधों का शहर है। यहां विशाल जल भंडार है। यहां पानी प्रबंधन के लिए पानी का समान बंटवारा हो तथा सभी को सिंचाई की सुविधा मिले, इस प्रकार की रणनीति बनाने की आवश्यकता है। कार्यशाला में रज्जाक, जयेस बादल, सुनील जैन, सुनील खजुरिया, रमन शर्मा आदि उपस्थित रहे।
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