ेहरू महाविद्यालय में पुस्तक के विमोचन करते जगदगुरू राजेन्द्रदास देवाचार्यजी महाराज
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ललितपुर। नेहरू महाविद्यालय के तुलसी सभागार में बुंदेलखंड विकास बोर्ड के सदस्य प्रदीप चौबे की बहन उमा चौबे द्वारा बुंदेली भाषा में अनुवादित श्रीमद्भागवत गीता का जगद्गुरु द्वाराचार्य मलूक पीठाधीश्वर डा. राजेंद्र दास महाराज ने विमोचन किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत गीता में भारत की आत्मा बसती है।
संस्कृत भारती एवं संस्कृत संस्कृति संस्थान उत्तर प्रदेश के कार्यक्रम में डा. राजेंद्र दास महाराज ने कहा कि संस्कृत एक भाषा नहीं, यह हमारी सनातन संस्कृति का प्रवाह है। संस्कृत भारतवर्ष की आत्मा है। यह संपूर्ण विश्व की अमूल्य धरोहर है। संस्कृत भाषा में निहित ज्ञान- विज्ञान, व्यक्ति और समाज के सर्वांगीण विकास के लिए श्रेष्ठतम भाषा है। श्रीमद्भागवत गीता मनुष्य को कर्मयोग के पथ पर चलना सिखाती है। गीता में भारत की आत्मा बसती है। गीता जीवन और संसार की चुनौतियों से सामना करने का संदेश देती है। गीता के उपदेशों को आत्मसात कर जीवन की अनेक व्याधियों से आसानी से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है। श्रीमद्भागवत गीता विश्व का महान ग्रंथ है। इसमें वेदों, उपनिषदों, शास्त्रों एवं पुराणों का सार है। बुंदेली भाषा में श्रीमद्भागवत गीता का अनुवाद होने से बुंदेलखंड के ग्रामीण परिवेश के लोगों को गीता के सार तत्व को समझने में सरलता होगी।
संस्कृत भारती के जिलाध्यक्ष डा. ओमप्रकाश शास्त्री ने कहा कि हमारी बुंदेली भाषा बुंदेलखंड के उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 17 जिलों सहित आसपास के कई जिलों में बोली जाती है। उमा चौबे ने इस कमी को समझा और कई वर्षों की मेहनत के बाद बुंदेली भाषा में श्रीमद्भागवत गीता का अनुवाद किया।
उमा चौबे ने कहा कि मुझे विद्यार्थी जीवन से बुंदेली भाषा से अनुराग व प्रेम है। अध्यापन काल के दौरान जब गीता का अध्ययन किया तो बुंदेली में गीता का अनुवाद करने का संकल्प मजबूत हुआ। कॉलेज प्रबंधक एवं बुंदेलखंड विकास बोर्ड के सदस्य प्रदीप चौबे ने कहा कि तिलक से लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तक सभी महापुरुषों ने श्रीमद्भागवत गीता से प्रेरणा प्राप्त की है। इस मौके पर तमाम लोग मौजूद रहे। आभार प्राचार्य डा. अवधेश अग्रवाल ने व्यक्त किया।
नेहरू महाविद्यालय में पुस्तक के विमोचन पर मौजूद लोग- फोटो : LALITPUR