गरीबी रेखा के नीचे जीवन- यापन करने वाले आवासहीन ग्रामीण परिवारों को सरकार द्वारा वर्ष 1985 में इंदिरा आवास योजना शुरू की गई। इसके पीछे मकसद यह था कि ग्रामीण इलाकों में झोपड़ियों व कच्चे मकानों में रहने वालों को बारिश का पानी, धूप व ठंड से निजात दिलाई जा सके। इसके लिए सरकार द्वारा दो किस्तों में 35-35 हजार रुपए की धनराशि भेजी जाती है। लेकिन, कुछ लोग योजना की धनराशि हड़पने के उद्देश्य से साठगांठ कर लाभार्थियों की सूची में शामिल हो जाते हैं और बिना आवास बनाए ही धनराशि निकाल लेते हैं।
वर्ष 2013-14 में डीआरडीए ललितपुर की बेवसाइट पर दर्ज इंदिरा आवास लाभार्थियों की डाटा इंट्रियों पर नजर दौड़ाएं तो ग्राम पंचायत चौकी में एक इंदिरा आवास का आवंटन वर्क आईडी संख्या यूपी- 40-005-13-001/01378 पर किया गया था। आवास निर्माण के लिए सरकार द्वारा 1 मई 2013 को चेक संख्या 924080 से उसके खाते में प्रथम किस्त के 35 हजार रुपए जमा किए। इसके बाद 30 मार्च 2014 को 624127 चेक संख्या से द्वितीय किस्त के 35 हजार रुपए जमा किए गए। लाभार्थी ने दोनों किस्त तो निकाल लीं, पर आज तक आवास का निर्माण नहीं कराया गया, जबकि डाटा इंट्री में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी ने 10 जनवरी 2015 को कार्य पूर्ण होने की जानकारी उच्चाधिकारी को दे दी है। इसी ग्राम पंचायत में एक अन्य वर्क आईडी 002/1431 पर आवास का आवंटन हुआ था। इसके लिए सरकार द्वारा 10 जुलाई 2013 को चेक संख्या 923415 से पहली किस्त और 30 मार्च 2014 को दूसरी किस्त जमा कराई गई थी। धनराशि निकाल लेने के बाद भी आवास का निर्माण नहीं कराया गया, जबकि ग्राम विकास अधिकारी ने 10 जनवरी 2015 को आवास पूर्ण होने की रिपोर्ट प्रेषित कर दी। इसी तरह ग्राम पंचायत साढूमल में भी करीब डेढ़ दर्जन आवासों के निर्माण में भी इसी तरह का घालमेल किया गया है।
ग्राम पंचायत कोरवास, ग्राम उल्दना कलां में तीन महिला अभ्यर्थियों ने आवास का निर्माण नहीं कराया, जबकि धनराशि निकाल ली गई। ऐसे ही ग्राम पंचायत सौजना में 11, कुम्हेड़ी में 03, कुरौरा में 01, गुंदरापुर में 02, भौंटा में 02, नैनवारा में 02, जखौरा में 01, मानिकपुर में 07, गुढ़ा में 01, अमौरा में 01 और बुदनी में 07 लाभार्थियों ने आज तक इंदिरा आवास का निर्माण नहीं कराया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इसकी जांच कराकर लाभार्थी को जिम्मेदार ठहराता है या फिर योजना से जुड़े अधिकारियों को।