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Lalitpur News: दलालों ने तय कर रखा है जांच से लेकर दवाइयों तक के दाम

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संवाद न्यूज एजेंसी



ललितपुर। मेडिकल कॉलेज (महिला अस्पताल) में दलालों ने जांच से लेकर दवाइयों तक के दाम तय कर रखे हैं। वे यहां आने वाले मरीजों को अच्छे इलाज का झांसा देकर गुमराह करते हैं। इनमें महिलाएं भी शामिल हैं। दलालों के साथ मरीज को उपचार लेने में कतारों में नहीं लगना होता है। कई बार तो पैसे लेने की स्टॉफ तक को जानकारी नहीं हो पाती है।

मेडिकल कॉलेज में मरीजों की सुविधा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। लेकिन, यह भी शोपीस बना हुआ है। यहां सुबह से ही दलालों का जमावड़ा शुरू हो जाता है। जनपद में सभी सुविधाओं वाला इकलौता अस्पताल होने से प्रतिदिन करीब 700 से 900 महिलाएं उपचार के लिए आती हैं। इसके अलावा इमरजेंसी में प्रसव के लिए भी महिलाएं आती हैं। भीड़ होने से महिलाओं को अधिक समय लगाता है। इसका फायदा दलाल जमकर उठा रहे हैं। महिलाओं को बहला फुसलाकर सही उपचार और जांच का भरोसा देकर झांसे में ले लेते हैं। इसके बाद दलालों का पैसे ऐंठने का कार्य शुरू हो जाता है। दलालों को पर्चा बनवाने से लेकर ओपीडी तक कतार में नहीं लगना होता है। यह सीधे ही पर्चा व ओपीडी में पहुंच जाती हैं। इन्हें चाहे पैथोलॉजी में जांच हो या अल्ट्रासाउंड कहीं पर भी खड़ा नहीं होना होता है। सीधे मरीज को अंदर ले जाकर जांच करा लेतीं हैं। इसके बाद दवाइयां लेती हैं, चिकित्सकों से बाहर की दवाइयां लिखवातीं है। मेडिकल स्टोर से दवाइयां दिलाने में भी कमीशन लेती हैं। यह सिलसिला दिन भर चलता है। इनकी संख्या एक दर्जन से कम नहीं है। कुछ कर्मचारियों की भी मिली भगत है। रोकने पर फर्जी मुकदमा में फंसाने की धमकी व अपमानित करतीं हैं। कैमरा में प्रतिदिन अस्पताल आने के बाद भी इन पर कार्रवाई नहीं हो सकी है।
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अल्ट्रासाउंड के लिए 500 रुपये तक वसूलती हैं



महिला मरीज से लगभग एक हजार रुपये तक ले लेती हैं। मरीजों को समस्याएं बताकर डरा देतीं हैं। जांच के लिए सैंपल देने पर बाहर ही 200 से 300 रुपये लेती हैं। अल्ट्रसाउंड जांच में 400-500 रुपये तक वसूल लेती हैं।

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खून बेचने वालों पर भी नहीं हुई कार्रवाई

अस्पताल में दलालों की स्थिति का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि बीते वर्ष पांच हजार रुपये में खून बेचने वाला दलाल पकड़ा गया था। जांच भी हुई। लेकिन, इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया ।
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अस्पताल में लगभग आठ से दस महिलाएं हैं जो प्रतिदिन अस्पताल में ही भटकती रहती हैं। मरीजों से पैसे ऐंठती हैं। इन पर रोक लगाने के लिए सभी सुरक्षाकर्मियों को निर्देशित किया गया है। आशाओं को भी आईकार्ड के साथ आने के निर्देश दिए गए हैं। प्रतिदिन आने वाली महिलाओं को चिह्नित किया जा रहा है। जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।

- डॉ. मीनाक्षी सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज
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